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नीरजा के बलिदान से कंधार के खौफ तक, जब हवा में बंधक बनीं जिंदगियां; ये हैं भारत के चर्चित हाइजैक कांड

Published: Thu, 01 Oct 2026 02:27 PM (IST)

भारतीय विमानन इतिहास में कई विमान अपहरण की घटनाएं हुईं, जहां अदम्य साहस का परिचय दिया गया। नीरजा भनोट के ...और पढ़ें

विमान हाईजैक के दौरान पायलट और क्रू ने दिखाया साहस। फोटो: आर्काइव

विमान हाईजैक के दौरान पायलट और क्रू ने दिखाया साहस। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. नीरजा भनोट ने पैन एम 73 में यात्रियों की जान बचाई

  2. कांधार संकट में कैप्टन देवी शरण ने धैर्य से विमान संभाला

  3. एनएसजी और क्रू ने कई हाईजैक में साहस दिखाया

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। विमान अपहरण यानी हाइजैकिंग विमानन इतिहास के सबसे खतरनाक और तनावपूर्ण अध्यायों में से एक रहा है। हजारों फीट की ऊंचाई पर जब सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी कुछ हथियारबंद लोगों के हाथ में चली जाती है, तब पायलट, केबिन क्रू और सुरक्षा बलों की सूझबूझ ही संकट की दिशा तय करती है।

भारतीय विमानन इतिहास में भी ऐसे कई मौके आए, जब हाइजैक हुए विमानों में सवार यात्रियों की जिंदगी खतरे में थी। लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में भारतीय पायलटों, क्रू मेंबर्स और एनएसजी कमांडोज ने साहस, धैर्य और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया।

नीरजा भनोट के अदम्य साहस से लेकर कांधार संकट में कैप्टन देवी शरण के धैर्य तक, ये घटनाएं आज भी याद की जाती हैं।

नीरजा भनोट: 23 साल की उम्र में बनीं ढाल

5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयार्क जा रही पैन एम की फ्लाइट 73 को कराची में अबू निडाल संगठन के चार सशस्त्र आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया था।

विमान में यात्रियों के साथ क्रू मेंबर्स की जिंदगी भी खतरे में थी। इसी दौरान एयर होस्टेस नीरजा भनोट ने असाधारण साहस का परिचय दिया। आतंकियों के काकपिट की ओर बढ़ते ही उन्होंने हाइजैक कोड सक्रिय कर दिया। इसके बाद तीनों अमेरिकी पायलट काकपिट हैच से बाहर निकलने में सफल रहे और विमान को उड़ान भरने से रोका जा सका।

Neerja Bhanot

इसके बाद आतंकियों ने अमेरिकी नागरिकों की पहचान करने के लिए उनके पासपोर्ट मांगने शुरू किए। नीरजा और उनकी टीम ने कई अमेरिकी पासपोर्ट छिपा दिए, जिससे यात्रियों को निशाना बनाना आतंकियों के लिए मुश्किल हो गया।

करीब 17 घंटे तक चले इस संकट के दौरान स्थिति बेहद भयावह हो गई। जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, तब नीरजा ने इमरजेंसी एग्जिट खोलकर यात्रियों को बाहर निकलने में मदद की।

तीन बच्चों को बचाने की कोशिश में नीरजा आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गईं। महज 23 साल की उम्र में उन्होंने अपनी जान देकर कई यात्रियों की जिंदगी बचाई।

कैप्टन देवी शरण: संकट के बीच धैर्य

24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 का पांच आतंकियों ने अपहरण कर लिया।

विमान में 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर्स सवार थे। अचानक सामने आए इस संकट में कॉकपिट क्रू पर यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी थी।

कैप्टन देवी शरण, फर्स्ट ऑफिसर राजिंदर कुमार और फ्लाइट इंजीनियर एके जिया ने बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में विमान के संचालन को संभाले रखा।

devi sharan

विमान को कई जगह ले जाया गया और आखिरकार कंधार पहुंचा। वहां कई दिनों तक यात्रियों को बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान कॉकपिट क्रू ने विमान के सिस्टम को चालू रखने और यात्रियों की स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह संकट करीब आठ दिनों तक चला और अंततः यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार को आतंकियों के साथ समझौता करना पड़ा।

राजा सांसी एयरपोर्ट 1993: कुछ ही पलों में NSG का ऑपरेशन

24 अप्रैल 1993 को दिल्ली से श्रीनगर जा रहे एक बोइंग 737 को एक आतंकी ने हाईजैक कर लिया। विमान को अमृतसर के राजा सांसी एयरपोर्ट पर उतारा गया।

स्थिति बेहद संवेदनशील थी। विमान के भीतर यात्रियों की जान खतरे में थी और किसी भी गलत कदम से बड़ा नुकसान हो सकता था।

ऐसे समय में एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज ने कार्रवाई की। कमांडोज ने विमान में प्रवेश कर आतंकी को काबू किया और यात्रियों को सुरक्षित निकाला।

ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यात्रियों को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ। इस घटना को भारत के काउंटर-हाइजैक अभियानों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।

IC-405: 20 घंटे की बातचीत के बाद आतंकियों का सरेंडर

5 जुलाई 1984 को श्रीनगर से दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-405 को नौ उग्रवादियों ने हाईजैक कर लिया और विमान को लाहौर ले जाया गया।

विमान में मौजूद यात्रियों के लिए यह लंबा और बेहद तनावपूर्ण संकट था। ऐसे समय में कॉकपिट और केबिन क्रू ने धैर्य बनाए रखा।

लगातार बातचीत के जरिए अपहरणकर्ताओं को उलझाए रखा गया और यात्रियों में पैनिक फैलने से रोकने की कोशिश की गई।

करीब 20 घंटे तक चले इस संकट के बाद स्थिति बिना बड़े खून-खराबे के समाप्त हुई और अपहरणकर्ताओं ने आत्मसमर्पण कर दिया।

इन घटनाओं में एक बात समान थी-संकट के बीच धैर्य

विमान हाईजैक की घटनाओं में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। हजारों फीट की ऊंचाई पर लिए गए छोटे से छोटे फैसले का असर सैकड़ों जिंदगियों पर पड़ सकता है।

नीरजा भनोट ने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्रियों को बाहर निकलने में मदद की। IC-814 के कॉकपिट क्रू ने आठ दिनों तक बेहद कठिन परिस्थितियों में विमान और यात्रियों को संभाले रखा।

राजा सांसी में NSG कमांडोज ने त्वरित कार्रवाई की, जबकि IC-405 में क्रू के संयम और बातचीत ने संकट को बिना बड़े नुकसान के खत्म करने में भूमिका निभाई।

भारतीय विमानन इतिहास की ये घटनाएं सिर्फ हाइजैकिंग की कहानियां नहीं हैं। ये उन पलों की याद हैं, जब डर और अनिश्चितता के बीच कुछ लोगों ने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाने को प्राथमिकता दी।

भारत से जुड़ीं हाईजैकिंग की घटनाएं

क्र. वर्ष/तारीख उड़ान/विमान रूट/स्थान घटना और नतीजा
1 1971, 30 जनवरी इंडियन एयरलाइंस ‘गंगा’ श्रीनगर–जम्मू विमान को हाईजैक कर लाहौर ले जाया गया। यात्रियों और क्रू को छोड़ दिया गया। बाद में विमान को लाहौर में जला दिया गया।
2 1972, 22 फरवरी Lufthansa Flight 649 टोक्यो–फ्रैंकफर्ट, दिल्ली से आगे विमान को हाईजैक कर अदन ले जाया गया। यात्रियों को बाद में सुरक्षित रिहा किया गया।
3 1973, 10 जून Royal Nepal Airlines DHC-6 बिराटनगर–काठमांडू विमान को हाईजैक कर बिहार के फोर्ब्सगंज में उतारा गया। रकम लूटने के बाद यात्रियों और क्रू को छोड़ दिया गया।
4 1976, 10 सितंबर इंडियन एयरलाइंस बोइंग 737 दिल्ली–मुंबई छह अपहरणकर्ताओं ने विमान को हाईजैक कर पाकिस्तान ले जाने की कोशिश की। करीब 17 घंटे बाद अपहरणकर्ताओं को काबू कर लिया गया और यात्री सुरक्षित बचाए गए।
5 1977, 28 सितंबर Japan Airlines Flight 472 पेरिस–टोक्यो, मुंबई से उड़ान के बाद मुंबई में ठहराव के बाद विमान हाईजैक कर ढाका ले जाया गया। यह भारत से जुड़ी विदेशी विमान की घटना थी।
6 1978, 20 दिसंबर इंडियन एयरलाइंस IC-410 कोलकाता–दिल्ली विमान को हाईजैक कर वाराणसी उतारा गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रिहाई सहित राजनीतिक मांगें रखी गईं। बातचीत के बाद अपहरणकर्ताओं ने आत्मसमर्पण किया।
7 1981, 29 सितंबर इंडियन एयरलाइंस IC-423 दिल्ली–अमृतसर विमान को हाईजैक कर लाहौर ले जाया गया। पाकिस्तानी SSG कमांडो ने कार्रवाई कर यात्रियों को मुक्त कराया।
8 1981, 25 नवंबर Air India Flight 224 जाम्बिया–मुंबई, महे एयरपोर्ट सेशेल्स के महे एयरपोर्ट पर हथियारबंद लोगों ने विमान पर कब्जा कर लिया। बातचीत के बाद यात्रियों और क्रू को सुरक्षित निकाला गया।
9 1982, 4 अगस्त इंडियन एयरलाइंस दिल्ली–श्रीनगर नकली बम के सहारे विमान को हाईजैक किया गया। विमान अमृतसर उतरा और अपहरणकर्ता ने आत्मसमर्पण कर दिया।
10 1982, 20 अगस्त इंडियन एयरलाइंस बोइंग 737 जोधपुर–दिल्ली हथियारबंद अपहरणकर्ता विमान को लाहौर ले जाना चाहता था। पाकिस्तान से लैंडिंग अनुमति नहीं मिलने पर विमान अमृतसर लौटा, जहां सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
11 1984, 5 जुलाई इंडियन एयरलाइंस IC-423 श्रीनगर–दिल्ली विमान को हाईजैक कर लाहौर ले जाया गया। करीब 17 घंटे बाद अपहरणकर्ताओं ने आत्मसमर्पण किया।
12 1984, 24 अगस्त इंडियन एयरलाइंस IC-421 दिल्ली–श्रीनगर सात अपहरणकर्ताओं ने विमान को हाईजैक किया। विमान लाहौर, कराची और फिर दुबई पहुंचा। बातचीत के बाद यात्रियों को मुक्त कराया गया।
13 1993, 22 जनवरी इंडियन एयरलाइंस IC-810 लखनऊ–दिल्ली विमान को हाईजैक कर वापस लखनऊ ले जाया गया। राजनीतिक मांगें रखी गईं। बातचीत के बाद अपहरणकर्ता ने आत्मसमर्पण किया।
14 1993, 27 मार्च इंडियन एयरलाइंस IC-439 दिल्ली–मद्रास अपहरणकर्ता ने बम होने का दावा कर विमान को अमृतसर उतरवाया। बाद में आत्मसमर्पण किया और कथित विस्फोटक नकली निकला।
15 1993, 10 अप्रैल इंडियन एयरलाइंस बोइंग 737 लखनऊ–दिल्ली चार छात्रों ने विमान को हाईजैक कर वापस लखनऊ उतरवाया। जमीन पर उतरने के बाद यात्रियों ने ही अपहरणकर्ताओं को काबू कर लिया।
16 1993, 24–25 अप्रैल इंडियन एयरलाइंस IC-427 दिल्ली–श्रीनगर विमान को हाईजैक कर अमृतसर उतारा गया। NSG के कमांडो ने ऑपरेशन अश्वमेध में कार्रवाई कर अपहरणकर्ता को मार गिराया और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
17 1994, 13 जनवरी इंडियन एयरलाइंस IC-995 मद्रास–कोझिकोड हाइजैकिंग का असफल प्रयास। आरोपी ने बम होने का दावा किया। विमान को बेंगलुरु डायवर्ट किया गया और आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया।
18 1999, 24–31 दिसंबर इंडियन एयरलाइंस IC-814 काठमांडू–दिल्ली पांच आतंकियों ने विमान हाईजैक किया। विमान अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए कांधार पहुंचा। तीन आतंकियों की रिहाई के बदले बंधकों को मुक्त कराया गया।
         

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