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'पायलट ही जब बन जाए हमलावर...' FlyDubai कांड से भारत में अलर्ट पर आईं सुरक्षा एजेंसियां; लिए कई बड़े फैसले

Published: Thu, 01 Oct 2026 01:03 PM (IST)Updated: Thu, 01 Oct 2026 01:07 PM (IST)

अबू धाबी से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में कॉकपिट के भीतर हुए हमले के बाद भारतीय विमानन ...और पढ़ें

लैंडिंग के बाद फ्लाईट से उतरते यात्री।

लैंडिंग के बाद फ्लाईट से उतरते यात्री।

HighLights

  1. फ्लाईदुबई कॉकपिट हमले के बाद भारतीय एजेंसियां अलर्ट हुईं।

  2. पायलटों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण अब और कड़े होंगे।

  3. स्काई मार्शलों की भूमिका और संख्या की समीक्षा की जाएगी।

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। अबू धाबी से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई ( एफजेड1073) के कॉकपिट के भीतर ओमानी फर्स्ट आफिसर द्वारा भारतीय मूल के पायलट-इन-कमांड कैप्टन स्मित मछार पर किए गए जानलेवा हमले और उससे उपजे हाइजैक अलार्म ने वैश्विक उड्डयन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस सनसनीखेज घटना की गूंज अब भारतीय विमानन सुरक्षा तंत्र तक पहुंच गई है। सूत्रों का कहना है कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस), उड़ान नियामक डीजीसीए और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश के हवाइ बेड़े, कॉकपिट प्रोटोकॉल और एविएशन सिक्योरिटी अपैरेटस का गहन रिव्यू ऑडिट शुरू कर दिया है।

इस घटना से सबक लेते हुए भारतीय उड्डयन प्रशासन केवल बाहरी खतरों तक सीमित न रहकर कॉकपिट के भीतर मानसिक स्वास्थ्य जांच, क्रू-कोआर्डिनेशन और स्काई मार्शल्स के रणनीतिक उपयोग का एक अभेद्य 360-डिग्री सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है।

फ्लाईदुबई से उजागर हुई कई चुनौतियां

9/11 के बाद से कॉकपिट सुरक्षा के ज्यादातर नियम यात्रियों या बाहरी खतरों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, लेकिन फ्लाईदुबई की इस घटना ने कॉकपिट के भीतर 'इनसाइडर थ्रेट' यानी पायलटों के बीच आपसी हिंसा की एक नई और खतरनाक चुनौती को उजागर कर दिया है।

इस हाइलेवल समीक्षा के दौरान भारतीय एजेंसियां मुख्य रूप से दो प्रमुख सुरक्षा स्तंभों पर केंद्रित हैं। पायलटों का मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और स्काई मार्शल्स की तैनाती।

संसदीय व डीजीसीए दिशानिर्देशों के तहत भारतीय एयरलाइंस में समय-समय पर साइकोमेट्रिक और मनोवैज्ञानिक फिटनेस परीक्षण किए जाते हैं, जिन्हें नए ऑडिट के तहत और अधिक कड़ा व अनिवार्य बनाने पर मंथन हो रहा है ताकि पायलटों के तनाव और मानसिक व्यवहार को समय रहते भांपा जा सके।

स्काई मार्शल की भूमिका की नए सिरे से होगी पुनर्समीक्षा

इसके साथ ही, भारत से मध्य पूर्व व अन्य संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर तैनात किए जाने वाले स्काई मार्शल की भूमिका और संख्या की भी नए सिरे से पुनर्समीक्षा की जा रही है।

ये कमांडो ऐसे विशेष हल्के और सटीक हथियारों से लैस होते हैं, जो विमान के केबिन प्रेशर या बॉडी को नुकसान पहुंचाए बिना किसी भी हमले या हाइजैक की स्थिति में तुरंत हमलावर को बेअसर कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जहां डीजीसीए कड़े लाइसेंसिंग व मेडिकल नियम तय करता है, वहीं बीसीएएस और एनएसजी या सीआइएसएफ सुरक्षा नीति व एंटी-टेरर प्रोटोकॉल लागू करते हैं।

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