'सड़कों पर साथ लेकिन मंच से नदारद', रामलीला मैदान में नजर नहीं आई CJP; सिर्फ दूरी या सियासी मजबूरी?
कांग्रेस के नेतृत्व वाले आइएनडीआइए और सीजेपी ने मिलकर वोट चोरी के मुद्दे प्रदर्शन किया था, लेकिन रामलीला मैदान में आयोजित रैली में सीजेपी गायब रही।

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके और कांग्रेस नेता राहुल गांधी। फोटो-दैनिक जागरण
HighLights
वोट चोरी के आरोपों पर आइएनडीआइए और सीजेपी ने किया था प्रदर्शन।
रामलीला मैदान की आइएनडीआइए रैली में सीजेपी मंच से रही दूर।
कांग्रेस सीजेपी को राजनीतिक हैसियत देने से बच रही है।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। पिछले महीने दिल्ली की सड़कों पर आंदोलनों और नारों के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाला आइएनडीआइए और जेन-जी का नेतृत्व करने का दावा करने वाली काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) वोट चोरी के आरोपों को लेकर साथ दिखे थे।
तब लगा था कि मोदी सरकार के खिलाफ दोहरा वार सुनियोजित है। निषेधाज्ञा के उल्लंघन में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने खुलकर आलोचना भी की। लेकिन इस कथित गठबंधन की तस्वीर रविवार को रामलीला मैदान में बदल गई।
इंडिया गठबंधन की रैली से सीजेपी नदारद
आइएनडीआइए की रैली में सीजेपी न मंच पर थी, न भीड़ में। उसे आमंत्रित करने की जरूरत भी नहीं समझी गई। सीजेपी के कुछ नेता रैली का माहौल देखने पहुंचे, लेकिन मंच से किसी ने उनकी पहचान नहीं की। शक्ति प्रदर्शन के दौरान न सीजेपी का झंडा-बैनर दिखा, न किसी नेता ने दल या उसके नेतृत्व का जिक्र किया।
सीजेपी को नहीं मिला न्योता
सीजेपी से जुड़े लोगों के अनुसार, पार्टी को रैली का आमंत्रण नहीं भेजा गया था। रैली से एक दिन पहले संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा था कि पार्टी जनहित के मुद्दों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सैद्धांतिक समर्थन करती है, लेकिन वह किसी की पिछलग्गू नहीं है।
उन्होंने सीजेपी को स्वतंत्र और तटस्थ मंच बताते हुए कहा कि वह अपनी अलग राजनीतिक पहचान से समझौता नहीं करना चाहती।
क्या है राजनीतिज्ञों की राय?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस सीजेपी के साथ दिखकर उसकी राजनीतिक हैसियत बढ़ाना नहीं चाहती। खासकर राहुल गांधी एक और आम आदमी पार्टी पैदा नहीं करना चाहते, जो कांग्रेस की राजनीतिक जमीन छीन ले। आप ने कांग्रेस से दिल्ली और फिर पंजाब छीना।
नेहा बोरा की नजदीकी NSUI को कर रही असहज
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को जिस तरह कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नजदीकी बढ़ रही है वह कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन एनएसयूआइ को असहज कर रही है।
बोरा को महारैली के मंच पर न सिर्फ जगह मिली, बल्कि बोलने का मौका भी मिला। वामपंथी छात्र संगठन की नेता नेहा बोरा को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इतनी अहमियत दिए जाने से एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस के नेता नाराज बताए जाते हैं।
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