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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर डिजिटल निगरानी, CAQM का 'पवन' प्लेटफॉर्म एक क्लिक पर देगा 5 राज्यों का डेटा

Published: Fri, 30 Oct 2026 10:18 PM (IST)

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली-एनसीआर सहित पांच राज्यों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए 'पवन' नामक एक एकीकृत डिजिटल ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. सीएक्यूएम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण को डिजिटल किया।

  2. 'पवन' प्लेटफॉर्म से 5 राज्यों की निगरानी संभव।

  3. उद्योगों, निर्माण स्थलों, पराली पर रहेगी नजर।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली सहित एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अब सिर्फ सरकारी रिपोर्ट और अधिकारियों की निगरानी पर निर्भर नहीं रहना होगा।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रदूषण के स्रोतों की पहचान से लेकर नियमों के उल्लंघन और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई तक पर नजर रखने के लिए एकीकृत डिजिटल कमांड सेंटर तैयार किया है।

एक प्लेटफॉर्म पर दिखेंगे 5 राज्यों के आंकड़े

पवन नाम के इस प्लेटफार्म पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रदूषण के आंकड़े एक ही जगह उपलब्ध होंगे। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य प्रदूषण की समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते उसकी पहचान करना और संबंधित एजेंसी को अलर्ट भेजना है।

इसके लिए 30 से अधिक एपीआइ और डेटा स्रोतों को एकीकृत किया गया है। इनमें 111 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, 2300 से अधिक उद्योग और 3200 से ज्यादा सक्रिय निर्माण स्थल शामिल हैं। यातायात के प्रदूषण वाले संवेदनशील स्थानों का डेटा भी इससे जोड़ा गया है।

कैमरों और पीएम सेंसर से होगी निगरानी

इस एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर आइ 3 सी के जरिये उद्योगों से निकलने वाले पीएम, सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड के उत्सर्जन की निगरानी की जाएगी। आनलाइन मानिटरिंग सिस्टम से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर मानकों से अधिक उत्सर्जन करने वाली इकाइयों की पहचान की जा सकेगी।

इसी तरह निर्माण स्थलों पर लगे कैमरों और पीएम सेंसर की मदद से धूल नियंत्रण के उपायों की निगरानी होगी। उल्लंघन सामने आने पर संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी को अलर्ट और उल्लंघन का स्क्रीनशाट भेजने की व्यवस्था भी है।

पराली से लेकर कूड़े के पहाड़ तक पर नजर

प्लेटफार्म पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, इसरो और अन्य स्रोतों से मिलने वाले उपग्रह आंकड़ों के आधार पर पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी होगी। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों से तुलना कर आग की घटनाओं वाले जिलों और हाटस्पाट की पहचान की जा सकेगी।

ओखला, भलस्वा, गाजीपुर, ग्रेटर नोएडा और भंडवारी लैंडफिल साइटों की गतिविधियों पर भी कैमरों के माध्यम से नजर रखी जाएगी। कूड़े के निस्तारण के लक्ष्य और वास्तविक प्रगति की तुलना भी होगी।

शिकायत से लेकर सरकारी कार्रवाई तक का हिसाब

ग्रीन दिल्ली और समीर एप पर आने वाली शिकायतों की स्थिति, लंबित मामलों और उनके निस्तारण की निगरानी भी इसी व्यवस्था में होगी। मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की लोकेशन और उनकी तैनाती का पता लगाया जा सकेगा। इससे यह भी देखा जा सकेगा कि सफाई मशीनें वास्तव में निर्धारित क्षेत्र में काम कर रही हैं या नहीं।

दिल्ली सहित पांचों राज्यों की वार्षिक कार्ययोजनाओं के 40 से अधिक बिंदुओं और 11 क्षेत्रों में हुई प्रगति की निगरानी का भी प्रविधान है। किसी निर्देश का पालन नहीं होने या निर्धारित मानकों से विचलन मिलने पर संबंधित एजेंसी को अलर्ट भेजकर कार्रवाई की स्थिति अपडेट कराई जाएगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की योजना

सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण पिथौड़े ने बताया कि इस व्यवस्था का मकसद अलग-अलग विभागों और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना तथा प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की प्रभावशीलता का आकलन करना है। आगे इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की भी योजना है।

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