जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : आइएस आतंकियों द्वारा इराक के मोसुल से अपहृत 39 भारतीयों की हत्या के मामले में दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका में केंद्र सरकार की लापरवाही की स्वतंत्र एजेंसी से जाच कराने की मांग की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने बृहस्पतिवार को याची व केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद कहा कि वह मामले में अपना फैसला बाद में सुनाएगी।

याची के वकील मोहम्मद प्राचा ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले से ही पता था कि आतंकियों ने अपहृत भारतीयों का कत्ल कर दिया है, लेकिन सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की और देश को यही बताती रही कि सभी भारतीय जिंदा हैं। वहीं, केंद्र व खुफिया विभाग की तरफ से वकील मानिक डोगरा ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक पूरी तरह आश्वस्त न हो ले मौत की पुष्टि नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सरकार ने मोसुल में फंसे कई लोगों को बचाया था और उस दौरान भारतीयों की मदद के लिए भारतीय दूतावास द्वारा हेल्पलाइन भी शुरू की गई थी। प्राचा ने कोर्ट से कहा कि वह इस मामले में स्वतंत्र जांच की वकालत इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वह यह जानना चाहते हैं कि भारतीयों की मौत कब और कहां हुई। मार्च में जब मृतकों के शव भारत लाए गए थे तो उनके परिजनों को ताबूत खोलने की भी इजाजत नहीं दी गई थी।

Posted By: Jagran

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