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    जीके पर हमलावर हुए सरना, डीएसजीपीसी भंग करने की मांग

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके पर विरोधियों के हमले जारी हैं। उन पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (शिअद दिल्ली) ने उनके खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू थाने में शिकायत भी दी है। उसने सरकार से कमेटी को भंग कर फिर से चुनाव कराने की मांग की है। 10 नवंबर तक जीके के पद नहीं छोड़ने पर उसने आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

    By JagranEdited By: Updated: Wed, 31 Oct 2018 07:48 PM (IST)
    जीके पर हमलावर हुए सरना, डीएसजीपीसी भंग करने की मांग

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके पर विरोधियों के हमले जारी हैं। उन पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (शिअद दिल्ली) ने उनके खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू थाने में शिकायत भी दी है। उसने सरकार से कमेटी को भंग कर फिर से चुनाव कराने की मांग की है। 10 नवंबर तक जीके के पद नहीं छोड़ने पर उसने आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

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    शिअद दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर जीके व कमेटी के अन्य पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गुरु के गोलक की लूट हो रही है। किताब छापने के नाम पर फर्जी बिल का भुगतान किया गया है। सिख श्रद्धालु द्वारा दिए गए 51 लाख रुपये का गबन किया गया है। इस वर्ष जनवरी में एक श्रद्धालु ने 24 लाख रुपये कमेटी के कर्मचारियों की वर्दी के लिए दिए थे, लेकिन दस माह बीत जाने के बाद भी वर्दी नहीं दी गई। इसी तरह से घी खरीदने में भी घोटाला किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछली कमेटी 123 करोड़ रुपये नकद और करोड़ों की जायदाद छोड़कर गई थी, जो भ्रष्टाचार के भेट चढ़ रहे हैं। आज कमेटी आर्थिक रूप से बदहाल हो गई है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि दो केंद्रीय मंत्रियों ने उनके खिलाफ चुनाव में साजिश की थी। उनकी वजह से गुरु के गोलक की लूट हो रही है, जिससे सिखों में आक्रोश है। इसलिए केंद्र सरकार कमेटी के ऊपर लगे आरोपों को गंभीरता से लेकर उसकी न्यायिक जांच कराए। उन्होंने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी इस मामले में चुप्पी तोड़ने और कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कमेटी को भंग करके तुरंत चुनाव कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि जीके दस तारीख तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो शिअद दिल्ली उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर करेगा।