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    शाहकोट के नतीजे ने दिल्ली में भी बजाई खतरे की घंटी

    नोट : पंजाब भी भिजवा दें ------------------ -जनता के बीच विश्वास खो रही आम आदमी पार्टी -ए

    By JagranEdited By: Updated: Thu, 31 May 2018 10:57 PM (IST)
    शाहकोट के नतीजे ने दिल्ली में भी बजाई खतरे की घंटी

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली :

    पंजाब के शाहकोट विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की करारी शिकस्त ने दिल्ली में भी पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। पहले राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव और फिर दिल्ली नगर निगम चुनाव में हार के बाद से पार्टी की हार का सिलसिला लगातार जारी है। पंजाब में जहां पार्टी प्रमुख विपक्षी दल है, वहां की शाहकोट सीट के उपचुनाव में बृहस्पतिवार को आप उम्मीदवार की जमानत जब्त होने को राजनीति के जानकार आप का तिलिस्म टूटने के रूप में देख रहे हैं।

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    शाहकोट विधानसभा क्षेत्र में हुए उप चुनाव में आप प्रत्याशी रतन सिंह को महज 1900 मत मिले हैं, जबकि एक वर्ष पहले ही हुए विस चुनावों में पार्टी को यहां से करीब 41 हजार वोट मिले थे। इससे पता चलता है कि एक साल में ही आप के प्रति पंजाब की जनता का मोहभंग हो गया है।

    दिल्ली के बाद पंजाब ही आप का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। मगर महज एक साल में ही पार्टी की ऐसी दुर्गति होना कई सवाल खडे़ करता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल की माफी की सियासत पर पंजाब इकाई में फूट पहले ही पड़ चुकी है। पंजाब से पूर्व कनार्टक, गुजरात और गोवा में भी आप के तमाम प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो चुकी है।

    आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दिल्ली में आप का प्रदर्शन कैसा रहेगा, ये तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन यदि यही स्थिति रही तो उसके लिए आगामी चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं होंगे। गत वर्ष 272 वार्डो के लिए हुए दिल्ली नगर निगम चुनावों में आप को एक चौथाई सीट भी नहीं मिली थी। इसी तरह विधानसभा चुनाव में जीती हुई राजौरी गार्डन सीट भी पार्टी उपचुनाव में गवां बैठी। सिर्फ बवाना विधानसभा सीट पर ही उपचुनाव में पार्टी अपनी इज्जत बचा सकी थी। -----------

    आम आदमी पार्टी ने जनता को सपने तो बहुत दिखाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद वे काम न करने के बहाने तलाशते रहते हैं। कभी किसी पर आरोप लगाते हैं तो कभी किसी पर। बाद में माफी मांग लेते हैं, इसीलिए जनता अब आप को गंभीरता से नहीं लेती। जनता की यह नाराजगी निश्चित रूप से अगले विधानसभा चुनाव में सामने आएगी।

    -अजय माकन, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस ------------

    केजरीवाल को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने से पूर्व शाहकोट के नतीजे भी देख लेने चाहिए। केजरीवाल ने खुद के दोनों पैर कटवा लिए दूसरों की कमर की लचक की कमियां गिनाने में। अब तो आप के पास विलाप ही एकमात्र विकल्प है।

    -कपिल मिश्रा, बागी विधायक, आप

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    एक आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी सरकार चलाने के लिए नहीं, बल्कि वैकल्पिक राजनीति का पर्याय बनकर आई थी, इसीलिए जनता ने दिल्ली में उसको स्पष्ट बहुमत दिया था। लेकिन, आज की तारीख में वह भी परंपरागत राजनीति ही करने में लग गई है। आलम यह है कि कल तक जिन नेताओं के खिलाफ बयान दे रही थी, आज उन्हीं से हाथ मिला रही है। ऐसे में जनता के बीच आप की गंभीरता और विश्वास दोनों खत्म हो रहे हैं।

    -अनुपम, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, स्वराज इंडिया