UP board result 2018: फसल काटने गई मां को पता ही नहीं था कि बेटे ने टॉप किया है
दिलचस्प बात यह थी कि भीषण गर्मी में फसल काटने में जुटी मां रेशम को यह पता ही नहीं था कि उनके बेटे ने परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करके जिला टॉप किया है।
गाजियाबाद [अनिल त्यागी]। 'प्रयास' की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि प्रतिभा न तो किसी संसाधन की मोहताज है और न ही उसे कोई उभरने से रोक सकता है। बस जरूरत है तो कठोर मेहनत और लगन की। मोदीनगर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित रोरी गांव निवासी ताराचंद दो कमरों के मकान में अपनी तीन बेटी व दो बेटों के साथ रहते हैं।
जिला टॉप किया
मकान में बनी दुकान में ही वो टेलरिंग का काम करते हैं। दुकान से होने वाली आमदनी ही परिवार की आय का मुख्य जरिया है। उनके बड़े बेटे राहुल ने मोदीनगर स्थित केएन मोदी साइंस एंड कामर्स कॉलेज से 12वीं कक्षा में 79.2 फीसद अंक हासिल कर बेहतर प्रदर्शन किया है। जबकि छोटे बेटे 'प्रयास' कादराबाद में रोरी मार्ग स्थित निरंजन सिंह नेहरा हायर सेकेंडरी स्कूल में 10वीं में पढ़ते हैं। रविवार को जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो 'प्रयास' ने 91.03 फीसद अंक प्राप्त करके जिला टॉप किया।
फसल काटने गईं थीं मां
दोपहर को दैनिक जागरण की टीम जब उनके घर पहुंची तो 'प्रयास' की मां रेशम खेत में फसल काटने के लिए गईं थीं। पिता दुकान का सामान लेने के लिए गाजियाबाद गए थे। जबकि 'प्रयास' अपने पिता की दुकान पर बैठकर कपड़े सिलाई कर रहे थे। बड़ी बहन पूजा, शिल्पी, भाई राहुल और काजल भी इसी काम में हाथ बटा रहे थे।
बधाई देने वालों का लगा तांता
बातचीत का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि उनके स्कूल के संस्थापक धर्मबीर सिंह नेहरा भी छात्र को बधाई देने के लिए उनके घर पहुंच गए। जैसे-जैसे गांव वालों को पता चल रहा था, उनकी आवाजाही भी लगी हुई थी। बच्चों की देखरेख के लिए घर पर वृद्ध दादी मौजूद थीं, जो बार-बार अपने पोते को सफलता पर दुलार करते नहीं थम रही थीं।
मेहनत से कमाए पैसों की कीमत को समझते हैं
पूछने पर 'प्रयास' ने बताया कि उन्होंने यह सफलता 6-8 घंटे की पढ़ाई के बाद पाई है। पढ़ाई के अलावा जो भी समय बचता है, वे दुकान पर अपने पिता के काम में भी बराबर सहयोग करते हैं। छात्र ने बताया कि वे अपने माता-पिता की कठोर मेहनत से कमाए पैसों की कीमत को समझते हैं, इसलिए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
मेहनत करके बच्चों को पढ़ाना जीवन का लक्ष्य
बकौल 'प्रयास' वह एनडीए की परीक्षा पास करके देश सेवा करना चाहते हैं। इसी दौरान दिलचस्प बात यह थी कि भीषण गर्मी में फसल काटने में जुटी मां रेशम को यह पता ही नहीं था कि उनके बेटे ने परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करके जिला टॉप किया है। फोन पर जब उनसे बात हुई तो उन्होंने कहा कि मेहनत करके बच्चों को पढ़ाना ही उनके जीवन का लक्ष्य है और उनके बच्चे उनकी मंशा को समझकर निश्चित रूप से आगे बढ़ेंगे।
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