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रेलवे स्टेशनों पर कचरा अब नहीं बनेगा सिरदर्द, देश के 15 स्टेशन बनेंगे 'मॉडल'; ऐसे बदलेगी व्यवस्था

Published: Wed, 07 Oct 2026 05:25 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, देश के 15 रेलवे स्टेशनों को ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आदर्श स्टेशन के ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर 15 रेलवे स्टेशन बनेंगे आदर्श।

  2. ठोस कचरा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक विधि अपनाई जाएगी।

  3. कचरे का पृथक्करण, संग्रहण और निस्तारण एक साल में होगा।

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर रेलवे के श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा, जालंधर कैंट, देहरादून और जींद सहित देश के 15 रेलवे स्टेशनों को ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।

यहां वैज्ञानिक तरीके से कचरे के संग्रहण से लेकर निस्तारण तक की व्यवस्था होगी। आने वाले समय में इसी माडल के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य स्टेशनों पर भी कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी।

देश में कचरा प्रबंधन के नियमों के उल्लंघन और इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे स्टेशनों को भी शामिल किया है। इसे लेकर पिछले महीनों में कोर्ट द्वारा कई आदेश दिए गए हैं।

इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति की देखरेख में स्टेशनों को स्वच्छता के मामले में आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इनमें पर्यटन व तीर्थ स्थलों वाले स्टेशनों के साथ ही अलग-अलग श्रेणियों (आकार के आधार पर) के स्टेशनों को शामिल किया गया है।

इस व्यवस्था के अंतर्गत चिह्नित रेलवे स्टेशनों को रेलवे बोर्ड द्वारा जून में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिसमें एक पूर्ण और कार्यात्मक अपशिष्ट प्रबंधन श्रृंखला स्थापित करने पर बल दिया जाएगा।

इन स्टेशनों पर उत्पन्न कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण, संग्रहण, स्थानांतरण, प्रसंस्करण/पुनर्चक्रण और निपटान करने के लिए आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा। पर्याप्त सफाईकर्मियों व उपकरणों की उपलब्धता तथा प्रशिक्षण से लेकर निगरानी तक की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी।

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इसके अंतर्गत स्टेशनों पर कचरे को चार श्रेणियों गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता संबंधी कचरा (जैसे सैनिटरी नैपकिन) और विशेष निगरानी वाला कचरा (जैसे इलेक्ट्रानिक या मेडिकल वेस्ट) में विभाजित कर अलग-अलग एकत्र किया जाएगा।

इनका वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण और निपटान किया जाएगा। इस कार्य में स्थानीय निकायों का भी सहयोग लिया जाएगा। साथ ही, महाप्रबंधक स्वयं इसकी निगरानी करेंगे, जिससे इस कार्य में किसी तरह की कमी न रह जाए।

रेलवे बोर्ड को देनी होगी कार्ययोजना

सभी जोनल रेलवे को अपने-अपने क्षेत्र के प्रस्तावित आदर्श रेलवे स्टेशनों का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए एक कार्ययोजना बनाकर रेलवे बोर्ड को सौंपनी होगी। इसमें इन स्टेशनों की वर्तमान स्थिति और उठाए जाने वाले भावी कदमों की जानकारी शामिल होगी।

अधिकारियों ने बताया कि एक वर्ष के भीतर यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

इस योजना में शामिल रेलवे स्टेशन

श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा, जालंधर कैंट, देहरादून, जींद, काठगोदाम, केएसआर बेंगलुरु, पुरी, प्रयागराज, रानी कमलापति (भोपाल), बनारस, सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल, जैसलमेर और हडपसर (पुणे)।

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