नहीं पहुंचा पूरे गांव में साफ पानी
नजफगढ़ के गांव खड़खड़ी नाहर के गांव के जोहड़ अन्य गांवों की तरह बदहाल हो गया है। इसकी नियमित सफाई नहीं
नजफगढ़ के गांव खड़खड़ी नाहर के गांव के जोहड़ अन्य गांवों की तरह बदहाल हो गया है। इसकी नियमित सफाई नहीं होती। गांव का गंदा पानी गांव के जोहड़ में गिरता रहता है। तालाब का पानी इस कदर गंदा हो चुका है कि यह अब नहाने धोने लायक नहीं रहा। गांव के निचले हिस्से में कहीं-कहीं शुद्ध पानी है, लेकिन शेष क्षेत्र के जमीन से खारा पानी ही निकलता है। विडंबना यह है कि शहर के पास बसे गांव में अभी पीने के लिए पानी की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। हालांकि, गांव में सरकारी ट्यूबवेल भी लगाया गया है, लेकिन यह पानी पीने लायक नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। ट्यूबवेल से खारा पानी निकलता है। इससे सब्जियां तक नहीं उगतीं, लेकिन पशुओं को भी यही पानी पीना पड़ता है। एक साल पहले भी स्थिति यही थी। आज भी इस गांव के पूरे घरों में साफ पानी नहीं आता है।
ऐतिहासिक विशेषता
मटियाला विधानसभा क्षेत्र में स्थित गांव खड़खड़ी नाहर का इतिहास तीन सौ साल पुराना है। गांव में यादव और ब्राह्माण समाज की बहुलता है। इनके पूर्वज हरियाणा के तेलपुरी से आकर बसे हैं। गांव में एक प्राचीन शिव शक्ति मंदिर है। इसमें ग्रामीण पूजा अर्चना करते हैं। गांव में एक कम्युनिटी सेंटर है। गांव के बीच एक चौपाल भी है। इस गांव को नाहर सिंह नामक एक व्यक्ति ने बसाया था। इसलिए खड़खड़ी के साथ नाहर शब्द जुड़ गया।
गांव की आबादी है ढाई हजार
गांव खड़खड़ी नाहर की आबादी 2500 है। यहां मतदाताओं की संख्या 1100 है। इसके आसपास खैरा, घुम्मनहेड़ा, गालिबपुर, खड़खड़ी जटमल, खड़खड़ी रौंद, हसनपुर, पंडावला गांव स्थित हैं।
तालाब बर्बादी के कगार पर
गांव के पिछले हिस्से में मंदिर और तालाब साथ साथ हैं। तीन साल पहले तक इसी तलाब में स्नान करने के बाद लोग ध्यान करते थे। तालाब की सुंदरता इसके चारों तरफ लगे पेड़ हैं। आज भी इस तालाब में बतख तैरते हैं और कई तरह के पक्षियों ने घोंसला बनाया है। देखरेख के अभाव में धीरे धीरे इस तालाब की रंगत बिगड़ रही है। बताया जाता है कि इस तालाब के जीर्णोद्धार के लिए फंड भी आया था, लेकिन उस फंड का आज तक अता पता नहीं चला। गांव के घरों से गंदे पानी की निकासी के लिए नालियां भी बनाई गई हैं। इन नालियों के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किया गया। ऐसे में गंदा पानी जोहड़ में ही गिरता है। हालात ये हो गए हैं कि अब ग्रामीण इस तालाब में स्नान करना तो दूर, आसपास फटकना तक पसंद नहीं करते।
डलाव के बावजूद कूड़ादान बनी फिरनी
शहर के खाली प्लाटों को कूड़ादान होते ग्रामीणों ने बहुत देखा था, लेकिन इस गांव के लोग मजबूरीवश डलाव पर कूड़ा डालने के लिए जाना पसंद नहीं करते। डलाव में गंदा पानी जमा होने से यहां पर झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे में ग्रामीण डलाव से दूर ही रहते हैं। घरों का कूड़ा गांव के चारों तरफ की फिरनी पर डाला जाने लगा। ऐसे में फिरनी की सड़कें कूड़े से अटी पड़ी है। गांव के ही चौक चौराहे कूड़ेदान बनने लगे हैं तो ग्रामीणों के माथे पर शिकन आने लगी है। कूड़ा गलियों के चौराहों के साथ नालियों में जमा होने लगी है। निगम के सफाईकर्मी न तो कूड़ेदान से कूड़ा उठाते हैं और फिरनी पर पड़े कूड़े को हाथ लगाते हैं। निगम के सफाईकर्मी गांव के लोगों की सुनने को तैयार नहीं होते।
जर्जर हाल में बस शेल्टर
घुम्मनहेड़ा मार्ग पर बसें खड़खड़ी नाहर गांव के किनारे भी वर्षो पहले बस शेल्टर का निर्माण कराया गया था, लेकिन इसके बाद इसके ऊपर रंग रोगन तक नहीं किया गया। देखरेख के अभाव में इस बस शेल्टर की छत जर्जर हो चुकी है। धूप, बारिश और ठंड के दौरान ग्रामीणों को बस पकड़ने में मुश्किलें आती हैं। आसपास के चार पांच गांव और शहर से आने जाने वाले यात्रियों को भी बस शेल्टर के आसपास पेड़ों की ओट में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। कमोबेश इस इलाके के बस शेल्टर की यही हालत है। ग्रामीणों ने बस शेल्टर को दुरुस्त करने के लिए मुख्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक इसे दुरुस्त नहीं किया गया।
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घुम्मनहेड़ा में बस डिपो जरूर बना है, लेकिन यहां पर महज खटारा बसें ही खड़ी होती हैं। अन्य गांवों के अपेक्षाकृत इस मार्ग पर बसें भी कम चलती हैंऔर जो चलती हैं बीच में ही खराब हो जाती है।
-रामानंद यादव।
गांव में पानी की आपूर्ति नहीं होती। यहां पानी के टैंकर भी कम आते हैं। अब जबकि गांव में एक कॉलोनी भी बस गई है। इसके बावजूद पानी की आपूर्ति की व्यवस्था नहीं की गई।
-धीरज।
गांव में जमीन की कमी नहीं है। फिर भी बच्चों के लिए गांव में स्टेडियम और बुजुर्गो के लिए पार्क की कमी खटक रही है। सुबह टहलने वालों का इस गांव की सड़क पर जमावड़ा लगा रहता है।
-उमेश कुमार।
गांव में खाली पड़ी जमीन का दिल्ली सरकार और नगर निगम भरपूर उपयोग कर सकता है, लेकिन दोनों के पास न योजनाएं हैं और न फंड। ऐसे में इस गांव का विकास रुक सा गया है।
-अतर सिंह।
गांव के कुछ सड़कों की सफाई होती है और कुछ की नहीं होती है। आधी अधूरी सफाई से गांव में गंदगी पसर जाती है। सफाईकर्मी गांव के लोगों के अनुरोध को भी ठुकरा देते हैं।
-जगदीश सिंह।
हमारा गांव शहरीकृत गांव की श्रेणी में आ चुका है। लोगों को टैक्स भी भरना पड़ता है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के लिए गांव के लोग तरस गए हैं। जो सुविधाएं पहले से मिल रही थी, उसमें भी कटौती होने लगी है। यह परेशानी का सबसे बड़ा कारण है।
-नारायण सिंह, प्रधान।
खड़खड़ी नाहर गांव इस इलाके के सबसे साफ सुथरा गांवों में से एक है। गांव की एक एक सड़क पक्की हो चुकी है। गलियों की नालियां भी पक्की और गहरी बनाई गई है। गांव में बड़ा डलाव घर भी बना है। सफाईकर्मी भी नियमित सफाई करते हैं। अपने वार्ड के सभी गांवों और कालोनियां का नियमित दौरा करता हूं। जो भी समस्या आती है उसे मौके पर निराकरण करता हूं। फिर भी खड़खड़ी नाहर गांव की सफाई में कोई कमी रह गई होगी तो उसे दुरुस्त किया जाएगा। गांवों में गंदगी नहीं रहने दी जाएगी।
-सत्येंद्र राणा, निगम पार्षद।
गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं भी सुन रहे हैं। एक-एक कर समस्याओं को सुनने के साथ निदान की योजना भी बनाई जा रही है। खड़खड़ी नहर के अलावा अन्य गांवों से गंदे पानी की निकासी समस्या को दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं। एक-एक कर सभी गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू होगी। अधिकतर गांवों में पानी की नई पाइप लाइन डाली जा रही है। इस इलाके के गांवों में पानी की आपूर्ति का भरसक प्रयास किया जा रहा है।
-गुलाब सिंह, विधायक, मटियाला विधानसभा क्षेत्र।
सफाईकर्मियों को सफाई करने के लिए लगाया गया है। गांव में डलाव होने के बावजूद फिरनी पर कूड़ा डालना उचित नहीं है। हर जगह सफाईकर्मी कूड़ा नहीं उठा पाते। अगर गांव के किसी एक छोर की सफाई नहीं हो रही है तो क्षेत्रीय अधिकारियों से शिकायत की जानी चाहिए। निगम की हेल्पलाइन पर अपनी बात रखी जानी चाहिए। सफाईकर्मियों पर व्यक्तिगत कार्यो को कराने के लिए दबाव नहीं दिया जाना चाहिए।
-मुकेश यादव, निदेशक, जन संपर्क विभाग, दक्षिणी निगम।
जागरण सुझाव
-गांव से गंदे पानी की निकासी का तुरंत इंतजाम हो।
- गांव के तालाब की सफाई कराकर साफ पानी जमा करने का इंतजाम किया जाना चाहिए।
-कलस्टर बसों की सुविधा इस मार्ग पर नहीं है। इन मार्गो पर इनकी संख्या तत्काल बढ़ाई जाए।
-गांव की फिरनी पर पडे़ कूड़े को तुरंत उठाया जाना चाहिए।
-गांव की खाली जमीन पर स्टेडियम और पार्क बनाने की योजना पर विचार किया जाना चाहिए।
-गांव में खाली पड़ी जमीन को विकसित करने के लिए निगम और दिल्ली सरकार योजनाएं बनाए।
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