जागरण संवाददाता, नई दिल्ली: नौटंकी का नाम जुबां पर आते ही यकायक फूहड़ संवाद और नाच-गाने का ख्याल जहन में आता है। लेकिन, ऐसा है नहीं। सही मायने में यदि नौटंकी की बात करें तो इसके परंपरागत रूप को परिभाषित करने के लिए एक नाम 'गुलाब बाई' ही काफी है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता गुलाब बाई ने अपने दौर में नौटंकी को जिस मुकाम तक पहुंचाया, वह पिछले एक दशक में कहीं लुप्त-सा हो गया था। अलबत्ता, नौटंकी के उसी अंदाज को अब स्वयं सेवी संस्था सोनचिरैया देश-दुनिया के लोगों के बीच ला रही है। यह कहना है सोनचिरैया की सचिव व लोकगीत गायिका मालिनी अवस्थी का।

मालिनी अवस्थी ने ये बातें सोमवार को उस दौरान कहीं, जब वे कानुपरी शैली में पेश की जाने वाली 'सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र' नौटंकी का रिहर्सल देखने पहुंची थीं। उत्तर प्रदेश के बनारस में नौटंकी की अपार सफलता के बाद मंगलवार को 'द ग्रेट गुलाब' थिएटर की ओर से इसका आयोजन दिल्ली के कमानी सभागार में किया जाएगा। मालिनी अवस्थी ने बताया कि कानपुरी शैली में होने वाली इस नौटंकी का अंदाज वही पुराना है, जो गुलाब बाई के समय 1960 -70 के दशक में होता था। अवस्थी ने बताया कि मंगलवार को होने वाली नौटंकी के मंचन में खुद गुलाब बाई की बेटी मधु अग्रवाल अहम भूमिका अदा करेंगी। यही कारण है कि इस नौटंकी को देखने के बाद यकीनन लोगों को इस बात का अहसास होगा कि असलियत में नौटंकी का मतलब होता क्या है। अवस्थी ने कहा कि फूहड़ता का पर्याय मानी जाने लगी नौटंकी की पुरातन कला को बचाने और उसके सही रूप से देश-दुनिया को अवगत कराने के लिए ही हमने यह प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजन के बाद हम देहरादून और फिर मुंबई का रुख करेंगे।

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नई पीढ़ी को भी जोड़ रहे हैं: मधु अग्रवाल

'द ग्रेट गुलाब' थियेटर की संचालक मधु अग्रवाल ने बताया कि करीब 30 से 35 कलाकारों की हमारी टोली अब भी नौटंकी को उसी अंदाज में पेश करती है, जैसे की सालों पहले होती थी। उन्होंने कहा कि यह कला बीते दस सालों में लुप्त होने के कगार पर जा पहुंची थी, लेकिन सोनचिरैया ने इसे अपनाया और इसमें नई जान फूंकने का प्रयास किया है। मधु ने बताया कि अब हम इस कला के साथ नई पीढ़ी को भी जोड़ रहे हैं। इसके लिए बाकायदा चार माह की ट्रेनिंग भी कराई जा चुकी है। मुध कहती हैं कि मंगलवार को हम करीब सवा घंटे की नौटंकी 'सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र' पर पेश करेंगे। इसी कार्यक्रम में हम दहीवाली नामक एक अन्य नौटंकी के गुदगुदाने वाले पहलू का भी मंचन करेंगे। यहां बता दें कि इस कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह से निशुल्क है तो देर किस बात की है, यदि नौटंकी के परंपरागत रूप से रूबरू होना है तो मंगलवार को शाम सात बजे कमानी सभागार का रुख करें।