होली आई रे..
जीवन में खुशियां और रंग भरने को होली का त्योहार अच्छा माध्यम है। यह हमारे नकारात्मक विचारों को भी दू
जीवन में खुशियां और रंग भरने को होली का त्योहार अच्छा माध्यम है। यह हमारे नकारात्मक विचारों को भी दूर करने में मददगार है। शादी के 18 साल बीतने के बाद होली का अंदाज आज भी पहले जैसा ही है, लेकिन अब रंगों के बजाय फूलों की होली खेलने की शुरुआत की है। मुझे अपने कॉलेज के दिनों की होली अब भी याद है, जब अपने दोस्तों के साथ जमकर होली खेलती थी। स्नातक के आखिरी वर्ष होली के दिनों में भी मस्ती की, जब परीक्षा सिर पर थी। उस समय की होली मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा। -हेमा छाबड़ा, व्यवसायी
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होली अपने आप में न सिर्फ रंगों बल्कि भरपूर मस्ती का त्योहार है। ऐसा दूसरे पर्व में देखने को नहीं मिलता है, क्योंकि इसका उल्लास लोगों के दिलों को जोड़ता और आपसी प्यार बढ़ाता है। हालांकि, मौजूदा वक्त में इसमें दिखावा और बनावटीपन आने लगा है। इस कारण यह पर्व अपनी खासियत, स्वाभाविकता और मूल अर्थ खोता जा रहा है। होली को यादगार बनाने के लिए परिवार और परिजनों के साथ उस दिन अधिक से अधिक वक्त गुजारना जरूरी है। बचपन की होली हमेशा याद आती है, जिसकी मस्ती कभी भूल नहीं सकते। -पूनम भसीन, निजी क्षेत्र में कार्यरत
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होली भाईचारे और प्रेम का पर्व है, लेकिन बदलते वक्त के साथ इस दिन लोग आपसी द्वेष निकालने के लिए भी इस्तेमाल करने लगे हैं। होली के नाम पर नशा, जुआ और दुराचार जैसी गतिविधियां बढ़ गई हैं। होली से जुड़ी यादों में मां हमेशा मेरे साथ रहती है। बचपन में वह मेरे लिए कई प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनाती थीं, जिसका स्वाद मैं कभी नहीं भूल सकता। पिताजी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें होली के रंगों में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन इस मौके पर हमसब मिलकर पूरे परिवार के साथ होली मनाते थे। -अशोक कुमार मुदगल, सेवानिवृत कर्मचारी
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