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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पृथक मिथिला राज्य के लिए किया प्रदर्शन

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Published: Tue, 24 Feb 2015 07:44 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : पृथक मिथिला राज्य की मांग को लेकर अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : पृथक मिथिला राज्य की मांग को लेकर अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर धरना दिया। समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर कुमार झा ने बताया कि स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद से ही मिथिला क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है। बिहार के साथ ही केंद्र की सरकार भी मिथिला क्षेत्र के विकास के प्रति उदासीन बनी हुई है। धरना की अध्यक्षता कर रहे बुचरू पासवान ने बताया कि मिथिला क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या हर साल आनेवाली बाढ़ है। लेकिन इस पर नियंत्रण के लिए आज तक न ही राज्य सरकार ने और न ही केंद्र सरकार ने कोई कारगर कदम उठाया है। इसके कारण खेती चौपट हो चुकी है। यहां के हजारों गरीब किसान रोजी रोटी की तलाश में राज्य से पलायन कर दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक रूप से भी मैथिली भाषा को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। सालों से सरकारी विद्यालयों में मैथिली भाषा के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार बार-बार मांग के बाद भी नियुक्ति करने को तैयार नहीं है।

समिति के अध्यक्ष बैजनाथ चौधरी ने कहा कि इस क्षेत्र के सामाजिक शैक्षणिक औद्योगिक व राजनीतिक विकास के साथ ही यहां की समस्याओं का एक मात्र निदान पृथक मिथिला राज्य ही है। धरने में प्रोफसर अमरेंद्र कुमार झा सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे।