थानों और सुप्रीम कोर्ट की मुहर से 'सत्यमेव जयते' गायब
पवन कुमार, नई दिल्ली
आप किसी भी थाने या अदालत में जाते हैं तो वहां पर आपको कहीं न कहीं दीवार पर यह संदेश जरूर लिखा मिलता है कि 'सत्यमेव जयते' अर्थात सत्य की हमेशा जीत होती है। इससे न्याय की आस लेकर पुलिस थाने या अदालत में जाने वाले व्यक्ति के मन में न्याय की आस जागती है। मगर, यह 'सत्यमेव जयते' देश की राजधानी के सभी थानों व देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट की मुहर से गायब हो चुका है। पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के थानों में रोजमर्रा के कामकाज के लिए जो मुहर इस्तेमाल की जा रही है उसमें राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के रूप में चार शेरों वाली मूर्ति तो है, लेकिन उसके नीचे अंकित किए जाने वाले शब्द 'सत्यमेव जयते' गायब हैं। यही स्थिति सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश के लिए जरूरी गेट पास पर लगाई जाने वाली सरकारी मुहर की भी है। गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए के तहत यह तय किया गया है कि चार शेरों वाली मूर्ति के प्रतीक चिह्न के नीचे 'सत्यमेव जयते' अनिवार्य रूप से लिखा जाना चाहिए। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ भारतीय प्रतीक चिह्न अनुचित प्रयोग एवं निषेध अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है।
इस चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता उल्हास पीआर ने किया है। उल्हास ने हाईकोर्ट के समक्ष इस संबंध में आवश्यक सुबूत पेश करते हुए संबंधित लोगों पर कार्रवाई और राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों का अनादर रोके जाने की मांग की है। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की है। ज्ञात हो कि दिल्ली हाईकोर्ट में फैसलों की मुहर से 'सत्यमेव जयते' गायब होने का मुद्दा दैनिक जागरण द्वारा नवंबर, 2013 में भी उठाया गया था।
क्या कहा गया है याचिका में
उल्हास ने याचिका में कहा है कि भारतीय संविधान के मुताबिक सभी सरकारी मुहर एवं अदालती फैसले के लिए प्रयुक्त की जाने वाली मुहर में अशोक स्तंभ का चार सिर वाला शेर प्रतीक चिह्न के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इस प्रतीक चिह्न के नीचे 'सत्यमेव जयते' लिखा जाना अनिवार्य है। मगर, 'सत्यमेव जयते' अब विभिन्न सरकारी कार्यालयों की मुहर से गायब हो चुकी है। इससे प्रतीक चिह्न का अपमान हो रहा है। लिहाजा, इस संबंध में विभिन्न सरकारी कार्यालयों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
कोट्स
भारतीय प्रतीक चिह्न का प्रयोग किसी भी गैर सरकारी संस्था द्वारा नहीं किया जा सकता। प्रतीक चिह्न को गलत तरीके से पेश करना एवं उसका किसी भी तरीके से अनादर करना अपराध की श्रेणी में आता है। इस तरह के अपराध में तीन साल की कैद या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या फिर दोनों ही सजाएं दिए जाने का प्रावधान है।
-सुमित वर्मा, अधिवक्ता, दिल्ली हाईकोर्ट
बदला जाएगा नेवी का 'लोगो'
मौजूदा समय में नेवी का जो लोगो अर्थात प्रतीक चिह्न है उसमें चार शेरों वाली मूर्ति के नीचे 'सत्यमेव जयते' अंकित नहीं है। इस खामी का पता चलने पर रक्षा मंत्रालय ने इसे दूर करने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय के संयुक्त निदेशक बी भट्टाचार्य ने इस संबंध में याचिकाकर्ता उल्हास पीआर को पत्र लिखकर सूचित किया है कि मंत्रालय अपनी गलती में सुधार करते हुए नेवी के मौजूदा प्रतीक चिह्न में बदलाव कर रहा है। नया प्रतीक चिह्न तैयार किया जाएगा और उसमें चार शेरों वाली मूर्ति के नीचे 'सत्यमेव जयते' भी अंकित किया जाएगा।
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