राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : उम्मीदवारों की पहली सूची तैयार कर रहे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। एक-एक सीट से कई-कई दावेदारों के कारण पार्टी के वरिष्ठ नेता आपस में उलझते दिख रहे हैं। हालांकि प्रदेश की सभी सीटें ऐसी हैं, जहां दो से अधिक नेता टिकट दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन जिन सीटों पर भाजपा काबिज है, वहां भी दो से अधिक दावेदारों के कारण पार्टी में खींचतान की स्थिति बनती दिख रही है।

पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री पद के दावेदार और वर्तमान में विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा के समक्ष भी कई दावेदार खड़े हो गए हैं। वह ग्रेटर कैलाश से चुनाव लड़े थे, लेकिन अब वहां से पूर्व महापौर आरती मेहरा, पूर्व विधायक विजय जौली, भाजपा की महामंत्री शिखा राय भी दावेदारी कर रही हैं।

उधर दूसरी प्रमुख सीट है शालीमार बाग। यहां से खुद प्रदेशाध्यक्ष विजय गोयल दावेदारी कर रहे हैं, जबकि उनसे पहले प्रदेशाध्यक्ष रहे विजेंद्र गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा भी इसी विधानसभा से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जबकि शालीमार बाग से वर्तमान विधायक रविंद्र बंसल की दावेदारी भी बनी हुई है।

ऐसी ही एक सीट है, रोहिणी। यहां से जय भगवान अग्रवाल विधायक हैं, लेकिन यहां से कई दावेदार मैदान में कूद चुके हैं। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता इस सीट पर भी दावेदारी कर रहे हैं, जबकि भाजपा प्रदेश कार्यालय मंत्री एस.के. शर्मा भी अपने पक्ष में गणित बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वृंदावन में वात्सल्य ग्राम के महामंत्री जय भगवान अग्रवाल की टिकट काटना आसान नहीं होगा। वात्सल्य ग्राम साध्वी ऋतंभरा का है और ऋतंभरा की भाजपा की पूरी पकड़ है।

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