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    1983 वर्ल्‍ड कप जीत, धोनी का 2011 में आइकॉनिक सिक्‍स या गाबा का किला फतह करना? शास्‍त्री ने अपने बताया कौन सा है सबसे खास पल

    By Jagran News Edited By: Geetika Sharma
    Updated: Wed, 24 Jan 2024 04:18 PM (IST)

    मंगलवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर वर्ल्ड कप विजेता नेशनल टीम के मुख्य कोच और कमेंटेटर रवि शास्त्री को हैदराबाद में बीसीसीआई की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। शास्त्री ने अपने करियर में कई बेहतरीन पलों को देखा है। इस दौरान भोगले ने इनसे कतरियर का सबसे बेहतरीन पल पूछा। उन्होंने बताया कि गाबा में जीत उनके कमेंट्री करियर का सबसे बड़ा पल है।

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    रवि शास्त्री को हैदराबाद में बीसीसीआई की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। फोटो- बीसीसीआई एक्स

    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली।  Ravi shastri shared the best moment of cricket and commentary career: मंगलवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर, वर्ल्ड कप विजेता, नेशनल टीम के मुख्य कोच और कमेंटेटर रवि शास्त्री को हैदराबाद में बीसीसीआई की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया।

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    40 साल से अधिक समय से जुड़े हैं क्रिकेट से 

    शास्त्री 40 सालों से अधिक समय से क्रिकेट के साथ जुड़े हैं। इस बीच हर्ष भोगले ने उनसे सवाल करते हुए अब तक के सबसे बेहतरीन पल के बारे में पूछा, जो उन्हें कही भी खुश कर सकता है। शास्त्री ने अपने करियर में कई बेहतरीन पलों को देखा है।

    क्या बोले शास्त्री

    शास्त्री ने कहा कि "मुझे लगता है, किसी एक को चुनना मुश्किल होगा। लेकिन मैं बहुत जल्दी बताऊंगा। मेलबर्न में 1985 में लॉर्ड्स पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल एक खास बात थी। 1983 में लॉर्ड्स की बालकनी में भारत की वर्ल्ड कप में जीत अहम पल था। वेस्टइंडीज में शतक और ऑस्ट्रेलिया में दोहरा शतक भी अहम था।

    ये था कमेंट्री करियर का बेहतरीन पल

    इसके अलावा कमेंट्री करते हुए 2011 विश्व कप फाइनल में जब एमएस ने उस गेंद पर छक्का लगाया था। इसके अलावा 2007 में भारत की टी20 विश्व कप में जीत। ऑस्ट्रेलिया में एक के बाद एक जीत अहम थी, लेकिन अगर आप मुझे पूछे कि सोने पर सुहागा क्या था। गाबा में आखिरी दिन जब ऋषभ पंत हमें जीत के साथ घर लेकर आए थे।

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    भावुक हुए शास्त्री

    मैं खिलाड़ियों को धन्यवाद देता हूं। शास्त्री इस अवॉर्ड को लेते हुए भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि यह काफी बड़ा पल है। मैंने 17 साल की उम्र में खेलने शुरु किया था और 30 साल में संन्यास लिया था। बीसीसीआई हमेशा मेरे साथ मौजूद रहा।  मैंने पिछले 40 सालों में बीसीसीआई को बढ़ते हुए देखा है और वर्ल्ड क्रिकेट में एक अहम बोर्ड बना है। यह मेरे लिए काफी खास पल है। 

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