भारतीय कप्तान की जिद ने बर्बाद कर दिया था लाला अमरनाथ का करियर, ड्रेसिंग रूम में जमकर हुआ था बवाल
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर लाला अमरनाथ को 1936 के इंग्लैंड दौरे से कप्तान से विवाद के बाद वापस भेज दिया गया ...और पढ़ें

लाला अमरनाथ

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर लाला अमरनाथ ने भारत के लिए सिर्फ 24 टेस्ट मैच खेले। उनके करियर में एक ऐसा विवाद हुआ, जिससे वे भारतीय टीम से 12 साल तक दूर रहे। ये सब एक कप्तान की जिद की वजह से हुआ। यहां तक कि अमरनाथ को बीच दौरे से भारत वापस भेज दिया गया था और उनके साथ ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने कप्तान के सामने अपने गुस्से का इजहार किया था।
लाला अमरनाथ का ये किस्सा 1936 का है, जब भारत आजाद भी नहीं था। उस समय भारत को ब्रिटिश इंडिया के रूप में जाना जाता था, जहां अंग्रेज राज कर रहे थे। 1936 में भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी और वहां पर ऐसा विवाद हुआ जिससे पूरी टीम इंडिया हिल गई थी। अमरनाथ को बीच दौरे से ही भारतीय टीम के कप्तान विजयनगरम के महाराजकुमार (विज्जी) ने वापस भेज दिया था।
लाला अमरनाथ और कप्तान विज्जी का विवाद
भारतीय क्रिकेट टीम 1936 में इंग्लैंड के दौरे थी, जहां माइनर काउंटीज के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में लाला अमरनाथ और विज्जी के बीच विवाद देखने को मिला। उस मैच में भारतीय कप्तान ने अमरनाथ को जानबूझकर देर से बल्लेबाजी करने के लिए भेजा था। वे घंटो पैड पहनकर बैटिंग का इंतजार कर रहे थे और फिर उसके बाद बल्लेबाजी का मौका मिला। इसके बाद वे ड्रेसिंग रूम में जब आए, तो गुस्से में थे और उन्होंने अपना बैट फेंक दिया था।
उस वक्त के भारतीय टीम के कप्तान विज्जी ने इसे अपना अपमान समझ लिया था और उन्होंने टीम के मैनेजर जैक ब्रिटन-जोनस से उनकी शिकायत की। लाला को बीच दौरे से भारत वापस भेज दिया गया था।
अमरनाथ पाए गए निर्दोष
इस विवाद की उस समय खूब चर्चा हुई थी। बाद में घटना की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसने जांच के बाद पाया कि अमरनाथ की कोई गलती नहीं थी। विज्जी ने उनके बैट फेंकने को अपना अपमान समझ लिया और उन्होंने अमरनाथ पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर वापस भेज दिया था। हालांकि, अमरनाथ पर ये आरोप साबित नहीं हुए थे।
अमरनाथ को करना पड़ा इंतजार
इस घटना का लाला अमरनाथ के करियर पर बुरा असर पड़ा। उन्हें टीम इंडिया में वापसी के लिए 12 सालों तक इंतजार करना पड़ा। इसी वजह से वे भारतीय टीम के लिए उतने मुकाबले नहीं खेल सके, जितने मैच खेलने की उनके अंदर क्षमता थी। उन्होंने टीम इंडिया के लिए 24 टेस्ट मैच खेले, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक के दम पर 878 रन बनाए। इसके अलावा गेंदबाजी में 45 विकेट झटके, जिसमें दो बार पांच विकेट हॉल शामिल रहा।
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