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    जिस सिडनी ग्राउंड में खेला जाएगा पांचवां टेस्ट, वहीं 16 साल पहले हुआ था 'मंकीगेट कांड'; पूरे विवाद की टाइम लाइन

    Updated: Thu, 02 Jan 2025 09:18 PM (IST)

    बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज 2007-2008 के दौरान भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। इस घटना के कारण विवाद हुआ और टीमों के बीच संबंध खराब हो गए। बाद में हुई सुनवाई में आरोप को आपत्तिजनक भाषा में बदल दिया गया जिससे सीरीज जारी रह सकी। इस विवाद को मंकीगेट कांड के नाम से याद रखा जाता है।

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    सिडनी में 2008 में हुआ था मंकीगेट कांड।

    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। मौजूदा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का आखिरी मैच भारतीय टीम सिडनी क्रिकेट गाउंड पर खेलेगी। भारतीय टीम के पास अपनी लाज बचाने का आखिरी मौका है, क्योंकि वह 2-1 से पिछड़ चुकी है।  हालांकि, 16 साल पहले इसी मैदान पर एक घटना घटी थी जो क्रिकेट जगत का सबसे चर्चित कांड बन गया। हम बात कर रहे हैं, मंकीगेट कांड की। 

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    'मंकीगेट कांड' भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट इतिहास में सबसे कुख्यात घटनाओं में से एक है। यह विवाद 2007-2008 बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज के दौरान जनवरी 2008 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में दूसरे टेस्ट मैच के दौरान शुरू हुआ था। यह कांड भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एंड्रयू साइमंड्स के बीच हुई बहस से उपजा था।

    रिकी पोंटिंग के बयान से मचा हाहाकार 

    गौरतलब हो कि दोनों के बीच लड़ाई नहीं हुई होती तो यह मैच कई अजीबोगरीब अंपायरिंग फैसलों के लिए याद किया जाता। अंपायर स्टीव बकनर और मार्क बेंसन चर्चा में थे। इनके गलत फैसलों से भारतीय टीम को सिडनी टेस्ट में हार मिली थी। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग ने टेस्ट मैच के आखिरी दिन शिकायत की कि हरभजन ने साइमंड्स को 'मंकी' कहकर नस्लीय टिप्पणी की है, फिर क्या था विवाद अंपायरिंग से हट गया और नस्लीय टिप्पणी पर जमकर हंगामा हुआ।

    ऐसे शुरू हुआ विवाद

    मामला भारत की पहली पारी से जुड़ा है। 4 जनवरी 2008, मैच के तीसरे दिन हरभजन सिंह बल्लेबाजी करने आए। सचिन तेंदुलकर (154 रन) के साथ हरभजन सिंह (63) ने 129 रन की साझेदारी की। इसी साझेदारी के दौरान हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच कहासुनी हुई। ब्रेट ली की गेंदबाजी के दौरान मिडऑफ पर फील्डिंग कर रहे एंड्रयू साइमंड्स ने नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े हरभजन सिंह से बहस की। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भज्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने साइमंड्स को 'मंकी' कहा था। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।

    'मंकीगेट कांड' की पूरी टाइम लाइन

    • 2 जनवरी से 6 जनवरी 2008 के बीच खेला गया टेस्ट मैच
    • तीसरे दिन हरभजन सिंह बल्लेबाजी करने आए
    • हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच बहस हुई
    • ब्रेट ली के ओवर में घटी घटना
    • मिडऑफ पर फील्डिंग कर रहे एंड्रयू साइमंड्स ने नॉन-स्ट्राइकर पर खड़े हरभजन से कहासुनी हुई
    • मैच के आखिरी दिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने भज्जी पर 'मंकी' कहने का आरोप लगाया
    • मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर ने फील्डरों के बयान पर हरभजन पर तीन मैच का बैन लगाया
    • भारतीय टीम और बीसीसीआई ने प्रोटेस्ट शुरु किया
    • बीसीसीआई ने हरभजन की सजा को अनुचित बताते हुए सीरीज से हटने की धमकी दी
    • भारतीय टीम ने कैनबरा जाने से मना किया
    • बीसीसीआई ने हरभजन के प्रतिबंध के खिलाफ आईसीसी में अपील दायर की
    • न्यूजीलैंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश जॉन हैनसेन ने सुनवाई की
    • हरभजन के साथ विवाद के दौरान बल्लेबाज कर रहे सचिन की गवाही सुनी गई
    • नस्लीय दुर्व्यवहार के आरोप को अपमानजनक भाषा का उपयोग करने में बदल दिया
    • सुनवाई के दौरान 'मंकी' कहने का सबूत नहीं मिला
    • हरभजन पर लगे प्रतिबंध को रद्द कर दिया गया और इसके बदले मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगा

    नस्लीय टिप्पणी का नहीं मिला सबूत

    मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर ने मैच के बाद सुनवाई की, जिसमें साइमंड्स, रिकी पोंटिंग और माइकल क्लार्क सहित ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की गवाही के आधार पर हरभजन को नस्लीय दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया। हरभजन पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगाया गया, जिसका भारतीय टीम ने कड़ा विरोध किया। बीसीसीआई ने दावा किया कि नस्लीय गाली का कोई निर्णायक सबूत नहीं है और हरभजन ने किसी भी तरह की नस्लीय भाषा का इस्तेमाल करने से इनकार किया।

    BCCI ने लिया मामले पर संज्ञान

    भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने हरभजन की सजा को अनुचित बताते हुए सीरीज से हटने की धमकी दी। भारतीय टीम ने इस मुद्दे के सुलझने तक अगले टेस्ट मैच के लिए कैनबरा जाने से इनकार कर दिया। बीसीसीआई ने हरभजन के प्रतिबंध के खिलाफ आईसीसी में अपील भी दायर की। बाद में न्यूजीलैंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जॉन हैनसेन ने औपचारिक सुनवाई की।

    सचिन ने निभाया अहम रोल

    इस मामले में सचिन तेंदुलकर की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। जब विवाद हुआ था सचिन, हरभजन सिंह के साथ फील्ड पर मौजूद थे। जज ने सचिन की गवाही सुनी, सचिन ने हरभजन सिंह का पक्ष लेते हुए जज को बताया कि भज्जी ने कोई नस्लीय टिप्पणी नहीं की थी। इसके बाद न्यायाधीश ने नस्लीय दुर्व्यवहार के आरोप को अपमानजनक भाषा का उपयोग करने में बदल दिया और हरभजन के प्रतिबंध को रद्द कर दिया गया। इसके बदले उन पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया।

    सचिन को बताया झूठा

    तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' में मंकीगेट घटना का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि हरभजन पर नस्लीय गाली का इस्तेमाल करने का गलत आरोप लगाया गया था, लेकिन उन्हें राहत मिली कि हरभजन का प्रतिबंध हटा दिया गया। सचिन के बयान के बाद तेंदुलकर को रिकी पोंटिंग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे खिलाड़ी झूठा बताते हैं।