सुनील गावस्कर का कॉलम

भारत के दो सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर कप्तान विराट कोहली और प्रमुख स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का इंग्लैंड में अधूरा काम छूटा हुआ था। 2014 में उनका आखिरी दौरा बहुत ही निराशाजनक था। हालांकि इन चार सालों में उन्होंने महान क्रिकेटर बनने की ओर बड़ा कदम उठाया है और लगभग शीर्ष पर पहुंच चुके हैं। बस आखिरी चरण बचा था, जो शायद सबसे मुश्किल भी था।

पहले टेस्ट मैच के आधे खत्म होने तक ही दोनों खिलाड़ी शीर्ष पर पहुंच चुके हैं और इस खेल के महान लोगों में अपना नाम लिखवा चुके हैं। इनकी प्रतिभा पर कोई शक कभी नहीं था, लेकिन दुनिया से ज्यादा उन्हें खुद को अपनी काबिलियत साबित करनी थी और इन्होंने यह साबित कर दिया। अश्विन ने पहले दिन ही गेंद को दोनों ओर स्पिन कराया और कोई यह नहीं कह सकता कि पिच से उन्हें मदद मिली। यह उनकी प्रतिभा थी, जो उन्होंने इंग्लिश बल्लेबाजों के इर्द-गिर्द जाल बुना। एलिस्टेयर कुक जैसे बल्लेबाज को क्लीन बोल्ड करना आसान नहीं होता, लेकिन अश्विन ने बहुत ही सहजता के साथ ऐसा कर दिया। इसके बाद भारतीय कप्तान की बारी थी, जिन्होंने दिखा दिया कि आखिर क्यों वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं। शुरुआत में वह सजग रहे, जो समझ में आता है क्योंकि भारत ने तीन विकेट गंवा दिए थे और जेम्स एंडरसन भी अच्छी स्विंग करा रहे थे। उन्हें किस्मत का भी साथ मिला। इसके बाद वह निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ टिके रहे। उनकी वजह से जो रूट की फील्ड पोजीशन बहुत ही बेकार लग रही थी। इस शतक को वह लंबे समय तक याद रखेंगे। उन्होंने न सिर्फ प्रतिभा दिखाई बल्कि भारत को जीत की स्थिति में भी पहुंचाया।

ऐसा करते वक्त उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दे दिया, जो कह रहे थे कि इस तरह की पारी खेलने के लिए काउंटी खेलना जरूरी होता है। कोहली अपार प्रतिभा के धनी हैं और नींद में भी वह रन बना सकते हैं। अगर भारत यह मैच भी जीत जाता है तो भी टेस्ट सीरीज से पहले सिर्फ एक तीन दिवसीय अभ्यास मैच नाकाफी है। कोहली से ज्यादा अन्य खिलाडि़यों को लाल गेंद के खिलाफ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। कोहली हर समय टीम को नहीं बचा सकते।

By Sanjay Savern