नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। आज से ठीक ग्यारह साल पहले श्रीलंकाई टीम के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट में एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया था, जिसे तोड़ना आज की पीढ़ी के लिए आने वाले कुछ सालों में नामुमकिन है। जी हां, मुथैया मुरलीधरन ने आज ही के दिन यानी 22 जुलाई 2010 को 800 टेस्ट विकेट लेने का कारनामा किया था और वे ऐसा करने वाले दुनिया के पहले और एकमात्र गेंदबाज बने थे।

कहावत ये है कि रिकॉर्ड टूटन के लिए बनते हैं, लेकिन मुथैया मुरलीधरन का ये रिकॉर्ड टूट जरूर सकता है, लेकिन आने वाले कुछ सालों में ऐसा संभव नहीं है। यहां तक कि अगले एक दशक तक मुथैया मुरलीधरन का ये रिकॉर्ड अटूट रह सकता है। श्रीलंकाई टीम के उस्ताद स्पिनर कहे जाने वाले मुरलीधरन ने गाले में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट मैच में अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम भारत के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की।

मुरलीधरन के 800 विकेट लेने की स्थिति एक हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी थी। मुरली को टेस्ट मैच में 8 विकेट चाहिए थे और वे सात विकेट ले चुके थे। ऐसे में 800 विकेट के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए केवल एक विकेट की जरूरत थी। उधर, दूसरी पारी में भारत पहले ही नौ विकेट को चुका था। ऐसे में कौतुहल मचा हुआ था कि क्या मुरली 800 विकेट तक पहुंच पाएंगे या नहीं, क्योंकि इस दिग्गज ने सीरीज शुरू होने से पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह पहले टेस्ट के बाद संन्यास ले लेंगे।

आखिरकार, वह क्षण आया जब मुरली ने भारतीय नंबर ग्यारह के बल्लेबाज प्रज्ञान ओझा की ऑफ स्टंप के ठीक बाहर एक गेंद फेंकी, जो तेजी से घूमी और इस पर ओझा ने बल्ला चला दिया और गेंद महेला जयवर्धने के हाथों में चली गई और वे कैच आउट हो गए। मुरली खुशी से झूम उठे, क्योंकि पूरी श्रीलंकाई क्रिकेट टीम उनको एक साथ गले लगाने और दिग्गज को बधाई देने के लिए आई थी। पूरा स्टेडियम पटाखों की आवाज से गूंज उठा और प्रशंसकों ने एक आखिरी बार अपने हीरो की जय-जयकार की।

मुरली ने 22.72 के आश्चर्यजनक औसत के साथ 133 टेस्ट मैच खेलने के बाद अपने टेस्ट करियर का अंत किया। उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ 2011 विश्व कप फाइनल खेलने के बाद वनडे से भी संन्यास ले लिया था। उन्होंने 534 एकदिवसीय विकेट अपने नाम किए थे, जो कि एकदिवसीय इतिहास में सबसे अधिक है। इस महानायक को श्रद्धांजलि देने के रूप में श्रीलंका ने ये टेस्ट मैच जीता था, लेकिन वर्ल्ड कप 2011 का फाइनल टीम हार गई थी।

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