अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। विराट, रोहित और फिर विराट..भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) इस चक्रव्यूह में कतई नहीं फंसना चाहता है। इस साल अक्टूबर में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाले टी-20 विश्व कप के बाद विराट कोहली इस फार्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे। अगले साल आस्ट्रेलिया में फिर टी-20 विश्व कप होना है। पांच बार मुंबई इंडियंस को आइपीएल खिताब दिलाने वाले रोहित शर्मा का विराट के बाद भारत का टी-20 कप्तान बनना तय है। इसका मतलब है कि अगले साल होने वाले टी-20 विश्व कप में भारत की कप्तानी वही करेंगे।

2023 में भारत में ही वनडे विश्व कप होना है। विराट ने फिलहाल वनडे और टेस्ट की कप्तानी नहीं छोड़ी है क्योंकि उनके दिमाग में 2023 विश्व कप है लेकिन बीसीसीआइ के पदाधिकारियों को लगता है कि वे ऐसे चक्रव्यूह में क्यों फंसे जिससे टीम इंडिया का भविष्य का रोड मैप ही संकट में पड़ जाए। बीसीसीआइ के एक सूत्र ने कहा कि विराट के कप्तानी छोड़ने के बाद पदाधिकारियों के बीच बातचीत हुई है लेकिन इसमें सब सामान्य चर्चा है। हालांकि यह विषय तो सामने आएगा ही कि हम अगले तीन विश्व कप में अलग-अलग कप्तान उतारते हैं तो उसका वर्तमान टीम और भविष्य की टीम को बनाने पर क्या असर पड़ेगा?

क्या आरसीबी की कप्तानी भी छोड़ेंगे विराट : विराट ने गुरुवार को चिट्ठी में लिखा था कि पिछले आठ-नौ सालों में सभी तीनों प्रारूपों में खेलने से उनका कार्यभार बढ़ा है। मुझे टेस्ट और वनडे भारतीय टीम को नेतृत्व करने के लिए खुद को समय देने की जरूरत है। हालांकि दिसंबर 2020 के बाद से भारतीय टीम ने सिर्फ आठ टी-20 खेले हैं। यह बात हजम नहीं होती कि वह तीनों प्रारूपों में खेलेंगे लेकिन सबसे कम खेले जाने वाला प्रारूप उनका कार्यभार कैसे बढ़ा रहा था?

अब यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या विराट अपना कार्यभार कम करने के लिए आइपीएल फ्रेंचाइजी रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की भी कप्तानी छोड़ेंगे? अगर वह ऐसा करते तो वाकई में उनका कार्यभार कम होता क्योंकि इससे उन्हें दो महीने कप्तानी से मुक्ति मिल जाती। विराट अब तक आरसीबी को एक भी खिताब नहीं दिला पाए हैं। यही नहीं वह भारत को एक भी आइसीसी ट्राफी नहीं दिला पाए हैं।

सब वही करेंगे तो हम क्या करेंगे : विराट ने टी-20 कप्तानी छोड़ने के बाद बीसीसीआइ को नए कप्तान और उप कप्तान के लिए नाम भी सुझाए थे जिससे बीसीसीआइ के कुछ अधिकारी नाराज हो गए हैं। उनका मानना है कि सब विराट ही करेंगे तो हम लोग क्या करेंगे? वह सबको बता रहे हैं कि उन्होंने ही कप्तानी छोड़ी है। वही अगले कप्तान और उपकप्तान का सुझाव दे रहे हैं, तो हम लोग क्या करेंगे? कप्तान तय करना बीसीसीआइ और चयनकर्ताओं का काम है।

मेंटर और टीम के चयन में हुए खेल से विराट को आया समझ : अगर विराट यह कह रहे हैं कि उन्होंने कार्यभार कम करने के लिए टी-20 की कमान छोड़ने का फैसला किया है तो वह गलत है। विराट जब कप्तान बने तब से या तो बीसीसीआइ लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हाजिरी लगा रहा था या सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विनोद राय के नेतृत्व वाली प्रशासकों की समिति (सीओए) उसे चला रही थी। इस पूरे दौर में विराट ने जो चाहा वह हुआ। उन्होंने जिसको चाहा, उसको खिलाया। एक तरह से उन्हें खुला हाथ मिला लेकिन अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय शाह, उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला जैसे मजबूत प्रशासकों के बीसीसीआइ में आने से विराट के फैसलों पर सवाल उठने लगे। फैसलों की निगरानी होने लगी।

इस बार टी-20 विश्व कप के टीम चयन के दौरान तो कप्तान होने के बावजूद विराट की कई चीजों को नकार दिया गया। रोहित की काफी सुनी गई। रविचंद्रन अश्विन को रोहित ही बैक कर रहे थे। उनका चयन हुआ। विराट, युजवेंद्रा सिंह चहल को टीम में नहीं डलवा पाए। यही नहीं उनके और मुख्य कोच रवि शास्त्री के होते हुए मेंटर के तौर पर महेंद्र सिंह धौनी की घोषणा ने तो विराट को बता दिया कि अब उनका एकाधिकार खत्म हो गया है। बस इसके बाद विराट ने टी-20 विश्व कप से पहले ही अप्रत्याशित घोषणा करके अपना चरखा दांव चल दिया। विराट के सलाहकारों को लगता है कि इससे उनकी वनडे विश्व कप की कप्तानी बनी रहेगी और टी-20 विश्व कप हारने की स्थिति में बीसीसीआइ द्वारा उन्हें कप्तानी से हटाने का डर भी खत्म हो गया।

Edited By: Sanjay Savern