Shubman Gill की कप्तानी से भारतीय क्रिकेट को मिलेगी नई दिशा, सुनील गावस्कर ने की बड़ी भविष्यवाणी
Sunil Gavaskar on Shubman Gill बीसीसीआई ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट से रिटायरमेंट लेने के बाद हाल ही में 5 टेस्ट मैच के लिए 18 सदस्यीय भारतीय टीम का एलान किया है। हिटमैन के संन्यास के बाद अब टेस्ट की कमान शुभमन गिल के हाथों में सौंपी गई है। वहीं ऋषभ पंत को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है।

सुनील गावस्कर का कालम। भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी को लेकर लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि अच्छी अंग्रेजी बोलना एक जरूरी योग्यता है। भले ही खिलाड़ी क्रिकेट की गहरी समझ रखता हो या ड्रेसिंग रूम में लोकप्रिय हो, अगर वह फर्राटेदार अंग्रेजी नहीं बोलता तो कुछ तथाकथित 'ब्राउन साहिब' उसे कमतर आंकते थे। सौभाग्य से अब वह दौर पीछे छूट चुका है।
आज यह मायने नहीं रखता कि एमसीसी आपके बारे में क्या सोचती है, बल्कि आवश्यक यह है कि आप मैदान पर टीम को एकजुट कर पाएं और जीत की ओर ले जा सकें।
शुभमन गिल की कप्तानी की घोषणा पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई क्योंकि वह उन सारी अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं जो पुराने सोच वाले लोगों को एक कप्तान में चाहिए होती थीं, अच्छा खेल, मीडिया में अच्छी प्रस्तुति और बेहतरीन अंग्रेजी।
Shubman Gill को लेकर सुनील गावस्कर की भविष्यवाणी
इस प्रकार, शुभमन गिल (Shubman Gill) की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गिल अपनी कप्तानी में टीम को किस ऊंचाई तक ले जाते हैं।इस बार चयन प्रक्रिया में कोई क्षेत्रीय खींचतान नहीं थी। जसप्रीत बुमराह, जो हमेशा टीम को प्राथमिकता देते हैं, ने खुद चयनकर्ताओं से कहा कि अपनी पीठ की समस्या के कारण वे शायद सभी टेस्ट न खेल पाएं, इसलिए किसी और को कप्तान चुन लेना बेहतर होगा।
इससे चयनकर्ताओं का काम और आसान हो गया। भारतीय टीम संतुलित दिख रही है और अब बीसीसीआई के पास पर्याप्त संसाधन हैं जिससे 16 की बजाय 18 खिलाड़ियों का चयन संभव हो पाया है। पांच टेस्ट छह हफ्तों में खेले जाएंगे, जिससे थकावट होना स्वाभाविक है।
इसी को देखते हुए छह तेज गेंदबाज चुने गए हैं और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे आलराउंडर को भी टीम में जगह मिली है। हालांकि इस व्यस्त कार्यक्रम में टीम के बाहर बैठे खिलाड़ियों को फार्म में लौटने का मौका मिलना मुश्किल है। दूसरी ओर करुण नायर की वापसी एक प्रेरणादायक कहानी है।
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वह और जयदेव उनादकट दो ऐसे नाम हैं जिन्होंने लगातार प्रदर्शन कर टीम में वापसी की कोशिश की। नायर, जिन्होंने एक तिहरा शतक लगाया था, 2018 में इंग्लैंड दौरे पर थे लेकिन एक भी मैच नहीं खेल पाए। अब जब उन्हें एक और अवसर मिला है, यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इसका कैसे उपयोग करते हैं। अगर वे सफल होते हैं, तो यह कहानी भारतीय क्रिकेट में सुनहरे अक्षरों में लिखी जा सकती है।
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