(सुनील गावस्कर का कॉलम)

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर (आरसीबी) और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के मुकाबले को आप गुरु-शिष्य के बीच मुकाबले के रूप में भी देख सकते हैं। निश्चित तौर पर गुरु महेंद्र सिंह धौनी ही हैं और शिष्य विराट कोहली हैं। धौनी की कप्तानी में ही विराट ने टेस्ट और वनडे में पदार्पण किया था। उन्हीं के नेतृत्व में ही उनकी कप्तानी निखरी। धौनी बहुत ज्यादा टीम बैठकों में विश्वास नहीं रखते और अन्य खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका देते हैं। मैदान में भी वह कभी अपना आपा नहीं खोते, इसी वजह से उन्हें कैप्टन कूल कहते हैं।

धौनी हैं कैप्टन कूल

बस टीम के विकेट लेने पर ही धौनी उत्साह में दिखाई देते हैं। इसके अलावा उनके हावभाव में मुश्किल ही बदलाव आता है। हां कभी-कभी वह किसी धीमे फील्डर को घूरते नजर आ जाते हैं या फिर किसी खराब थ्रो पर थोड़ी नाराजगी जताते हैं, लेकिन अगर कोई कैच छूट जाती है या कोई गेंदबाज चौका खाता है, तब भी वह शांत बने रहते हैं। इस वजह से खिलाड़ी उनका सम्मान करते हैं और शायद उनके लिए यह आखिरी चीज होगी कि वह कभी दर्शकों के सामने उनका अपमान करें। शायद वह ड्रेसिंग रूम के भीतर जाकर उन्हें समझाते हों और उस चीज को कोई खिलाड़ी बुरा भी नहीं मानेगा।

कोहली हैं अग्रेसिव कप्तान

कोहली शायद इसके पूरी तरह से उलट हैं। वह मैदान पर अपनी भावनाएं छिपाते नहीं हैं और उनकी खुशी व निराशा टीवी पर अक्सर दिखाई देती रहती है। हालांकि हर कोई देख सकता है कि उन्होंने खुद पर बहुत मेहनत की है ताकि कैच छूटने या खराब फील्डिंग पर वह गुस्सा न हों। कप्तानी संभालने के बाद वह अपनी भावनाओं को काबू में रखना सीख रहे हैं, खासतौर से मैदान में अपनी निराशा को वह आसानी छिपा लेते हैं। एबी डिविलियर्स की बदौलत आखिरी मैच में जीत के बाद आरसीबी को उम्मीद होगी कि वह इस जीत की लय को बरकरार रखेगी। उन्हें उम्मीद होगी कि उनके कप्तान फिर से शतक लगाने वाली फॉर्म में लौटें, जैसे वह कुछ सत्र पहले थे। इन पिचों पर गेंदबाजी करना आसान नहीं है और ऐसे में उन्हें काफी मुश्किल हो रही है।

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एकजुटता है चेन्नई की ताकत

सीएसके को देखकर लग रहा है, जैसे वे कभी दूर गए ही नहीं थे। जिस ढंग से यह टीम एकजुट दिख रही है और दबाव को झेल रही है, वह शानदार है। इसका सीधा सा कारण है कि टीम के प्रमुख खिलाड़ी दो साल के प्रतिबंध के बाद भी लगभग वही हैं और उनके प्रशंसक सिर्फ चेन्नई तक सीमित नहीं हैं बल्कि पूरे भारत में हैं और इसके पीछे एकमात्र कारण महेंद्र सिंह धौनी हैं।

(पीएमजी)

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Posted By: Pradeep Sehgal