(सुनील गावस्कर का कालम) 

मुझे बहुत ही भारी मन से लिखना पड़ रहा है कि जिस व्यक्ति ने भारत की पहली स्पो‌र्ट्स मैनेजमेंट कंपनी खोलने का विचार दिया था वह सुमेध शाह अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। इस तरह पिछला सप्ताह काफी गमगीन और दुखों से भरा हुआ रहा, क्योंकि पहले मेरे कप्तान और मेंटर वासु परांजपे हमारे बीच नहीं रहे और उसके बाद मेरे जोड़ीदार सुमेध भी इस संसार को छोड़कर चले गए। प्रोफेशनल मैनेजमेंट ग्रुप (पीएमजी) का विचार सुमेध के पास तब आया जब वह एक विज्ञापन एजेंसी के साथ काम कर रहे थे। सुमेध मेरे पास उनके एक क्लाइंट के लिए एक एंडोर्समेंट का प्रस्ताव लेकर आए।

जब उन्होंने मुझे इसकी अवधारणा समझाई और मैंने उत्पाद का समर्थन करना स्वीकार कर लिया तो उन्होंने अपनी कुर्सी पर झुकते हुए मुझसे पूछा कि मैं कितनी फीस की उम्मीद कर रहा हूं। मुझे नहीं पता था कि कितनी मांग रखनी है, इसलिए मैं परेशान हो गया था। फिर उन्होंने मेरी बेचैनी देखी और मुझसे पूछा कि क्या मैंने अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन समूह (आइएमजी) के बारे में सुना है, जो जैक निकलास और अर्नी पामर जैसे पेशेवर गोल्फर के विज्ञापन और आयोजनों को संभालता है। अगर आपने सुना होता तो शायद अंदाजा लगा लेते।

इसके बाद उन्होंने मुझे समझाया कि जब इन दोनों दिग्गज खिलाडि़यों में से किसी एक के पास उत्पाद के लिए विज्ञापन का प्रस्ताव आया तो उन्होने सीधे इस मामले को आइएमजी को दे दिया, जिन्होंने तब बातचीत की और यह सुनिश्चित किया कि खिलाडि़यों को उत्पाद के प्रचार के साथ उनके नाम के लिए उचित मूल्य मिले। फिर उन्होंने मेरा जिक्र करते हुए कहा कि अगर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान किसी धनराशि को बताने में हिचकिचाते हैं तो शायद आइएमजी जैसी कोई कंपनी इस समस्या को हल करने में मदद कर सकती है। इसके बाद मैंने उनसे आइएमजी के बारे में मुझे एक नोट देने के लिए कहा जो उन्होंने शीघ्र ही दिया और हम एक पेशेवर प्रबंधन समूह (पीएमजी) स्थापित करने के लिए सहमत हो गए।

हमारा पहला असाइनमेंट स्वीडिश डेविस कप टीम के साथ था जो बेंगलुरु में भारत से खेलने आ रही थी। इस बात को 35 साल से अधिक समय हो चुका है और अगर मुझे सही ढंग से याद आता है तो उस समय उनकी टीम में शीर्ष-10 टेनिस खिलाडि़यों में से चार खिलाड़ी कुछ हजार पाउंड के लिए करार पर सहमत हुए थे। टेनिस रैंकिंग में शीर्ष-चार की उपस्थिति के बावजूद हमें स्वीडन के लिए कोई प्रायोजक नहीं मिला और इसलिए हमें पहले काम से नुकसान हुआ था।

हालांकि नुकसान के बावजूद हम पीछे नहीं हटे और अब पीएमजी जैसी कई खेल प्रबंधन एजेंसियों को देखना बहुत अच्छा लगता है, जो विभिन्न खेलों और खिलाडि़यों को संभाल रही हैं और उनके लिए जीवन आसान बना रही हैं। सुमेध तबसे लेकर हमेशा पीएमजी के साथ एक चट्टान की तरह खड़े रहे थे, जबकि मैं अभी भी अपनी कमेंट्री को लेकर विदेश यात्रा पर जाता रहता हूं। उन्होंने पीएमजी का पालन-पोषण किया और अगर आज पीएमजी शायद खेल प्रबंधन में सबसे सम्मानित नाम है तो यह सुमेध और उनके अथक प्रयासों की बदौलत है।

वह एक बहुत बड़े क्रिकेट प्रशंसक भी थे और उनके लिए भारतीय क्रिकेट किसी भी व्यावसायिक विचारों से ऊपर था और इसलिए वह भारतीय क्रिकेट को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी चीज को बिना सोचे समझे खारिज कर देते थे। सुमेध और वासु शायद अब स्वर्ग में क्रिकेट पर कुछ दिलचस्प चर्चा कर रहे होंगे। सुमेध को क्रिकेट का एक बिंदु समझाने के लिए वासु को अपनी पूरी कोशिश करनी होगी। दोनों की आत्मा को शाश्वत शांति मिले। इसी तरह के दुख भरे माहौल बीच खेल जगत में दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविक यूएस ओपन के फाइनल में हार गए, जिससे भी मुझे काफी निराशा हुई।

जोकोविक अगर इस ग्रैंडस्लैम को अपने नाम करते तो वह 1969 में राड लेवर के बाद एक कैलेंडर वर्ष के सभी चार ग्रैंडस्लैम जीतने वाले पहले खिलाड़ी बनते। हालांकि रूसी टेनिस खिलाड़ी डेनियल मेदवेदेव की ताकत के आगे जोकोविक टिक नहीं सके, जिन्होंने इस ग्रैंडस्लैम में अभी तक अपने जीवन का सबसे सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला। कभी-कभी अंतिम चरण सबसे कठिन होता है जैसा कि जोकोविक को पता चल गया होगा, लेकिन सभी चार ग्रैंडस्लैम के फाइनल में पहुंचकर उन्होंने निश्चित रूप से उन सभी (रोजर फेडरर और राफेल नडाल) में सबसे महान कहलाने का दावा पेश कर दिया है। इस बात को मेदवेदेव ने भी ट्राफी जीतने के बाद स्वीकारते हुए कहा था कि जोकोविक टेनिस इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं।

जिस तरह से टेनिस में नई प्रतिभाएं आ रही हैं, कैलेंडर ग्रैंडस्लैम की संभावना कम होती जा रही है और यही कारण है कि यूएस ओपन के फाइनल में जोकोविक की हार बहुत दुखद है। लेकिन, फिर जैसा कि हमने देखा, सर डान ब्रैडमैन की आखिरी पारी के साथ, जिसमें वह दूसरी गेंद में ही शून्य पर क्लीन बोल्ड हो गए थे जबकि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 100 का औसत पाने के लिए सिर्फ चार रन चाहिए थे। इस तरह खेल में हमेशा कहानियों का अंत सुनहरा नहीं होता है।

Edited By: Sanjay Savern