नई दिल्ली, प्रेट्र। सचिन तेंदुलकर ने दिवंगत शेन वार्न को श्रद्वांजलि देते हुए उन्हें 'कड़ा प्रतिस्पर्धी' करार दिया जिनका सामना करने के लिए हमेशा अलग तरह से तैयारी करनी पड़ती थी क्योंकि आस्ट्रेलियाई स्पिन दिग्गज 'माइंड गेम' खेलने में बहुत अच्छा थे और अपने हावभाव से कुछ भी अहसास नहीं होने देते थे।खेल के सर्वकालिक महान खिलाडि़यों में से एक वार्न का 52 वर्ष की उम्र में चार मार्च को थाइलैंड में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

तेंदुलकर ने कहा, 'शेन वार्न के खिलाफ सही मायनों में मेरी पहली उचित सीरीज 1998 में भारत में थी। सभी ने उस सीरीज को तेंदुलकर बनाम शेन वार्न करार दिया था। और लोगों को याद दिलाने के लिए कि यह तेंदुलकर बनाम शेन नहीं है बल्कि भारत बनाम आस्ट्रेलिया थी। इस तरह की चीजें आपको दबाव में डाल देंगी। जब आप उनके जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज का सामना कर रहे हों तो आप चीजों को आसान मानकर नहीं चल सकते। इसलिए मुझे अच्छी तरह से तैयारी करनी थी, न केवल नेट पर बल्कि जब आप कमरे में बैठे हों तब भी आपको उससे एक कदम आगे रहना होगा। आपको यह जानना होगा कि वह क्या सोच रहा होगा क्योंकि वह दबाव बनाने में बहुत अच्छा था और माइंड गेम खेलता था और आपको आउट करने की रणनीति बनाता रहता था।'

तेंदुलकर का कई बार वार्न से आमना-सामना हुआ लेकिन भारत में 1998 की सीरीज क्रिकेट किस्सों में अहम स्थान रखती है। तेंदुलकर ने कहा, 'आप उनके हाव भाव पर गौर करते हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। उनके हाव भाव के बारे में कोई नहीं जानता था चाहे वार्न ने चार विकेट लिए हों, पांच विकेट लिये हों या एक भी विकेट नहीं लिया हो। वह कड़े प्रतिस्पर्धी थे और उनकी प्रत्येक गेंद में इसका पता चलता था।'

उन्होंने कहा, 'इसलिए यदि आप दिन के आखिरी ओवरों में भी उनका सामना कर रहे हों तब भी आपको सतर्क रहना होता था। कई अच्छे स्पिनर थे, लेकिन शेन सबसे हटकर थे। वह उन कुछेक गेंदबाजों से एक थे जिनके खिलाफ आप गेंद को उछाल पर नहीं मार सकते थे।' वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा ने भी वार्न की प्रशंसा की और उन्हें आस्ट्रेलिया का सबसे सक्षम खिलाड़ी करार दिया। लारा ने कहा, 'मैं एक ऐसे देश में पला-बढ़ा हूं जहां स्पिन गेंदबाजी का बोलबाला है। कैरेबियाई क्षेत्र के निचले हिस्सों जैसे त्रिनिदाद, गयाना में हमने बहुत अच्छी तरह से स्पिन को खेला। और वार्न ने कई अन्य खिलाड़ियों को बहुत परेशान किया। मैंने उनके खिलाफ कई जंग जीती लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।'

उन्होंने कहा, 'वह हमेशा ऐसी चमत्कारिक गेंद कर जाते थे जिसका आपको आभास तक नहीं होता था। इसलिए अपने पूरे करियर के दौरान वार्न का सामना करते हुए मुझे सतर्क रहना पड़ा। वह बेहतरीन गेंदबाज थे जिसमें एक ऐसे गेंदबाजी आक्रमण में अपने लिए जगह बनाई जिसमें जबरदस्त तेज गेंदबाज थे।' तेंदुलकर ने कहा, 'उनका जिंदगी के प्रति अलग तरह का नजरिया था। वह हमेशा सकारात्मक रहते थे और दिल खोलकर स्वागत करते थे। यह स्वीकार करना वास्तव में मुश्किल है कि वह अब हमारे बीच में नहीं है।'

Edited By: Sanjay Savern