'स्पिनर्स को बदलनी होगी रणनीति', न्यूजीलैंड दौरे से पहले अश्विन की भारतीय खिलाड़ियों को अहम सलाह
न्यूजीलैंड दौरे की शुरुआत से पहले रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय स्पिनर्स को बड़ी सलाह दी है। न्यूजीलैंड दौरा टी20 सीरीज के साथ शुरू होगा।
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रविचंद्रन अश्विन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नितिन नागर, नई दिल्ली। भारत के पूर्व आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में भारतीय स्पिनरों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। टी-20 क्रिकेट में अब केवल गेंद को टर्न कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बल्लेबाजों को पढ़ना और परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
नितिन नागर से विशेष बातचीत में अश्विन ने कहा कि न्यूजीलैंड में भारतीय बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानसिक मजबूती होगी।
न्यूजीलैंड में तीनों प्रारूपों में भारतीय स्पिनरों के लिए कितनी चुनौती होगी?
न्यूजीलैंड में कुछ ड्राप इन पिचें हैं, जबकि कुछ पिचें बनाई गई हैं। मैंने न्यूजीलैंड में सिर्फ एक टेस्ट मैच, बेसिन रिजर्व में खेला है। वहां गेंद में ड्रिफ्ट और अच्छा उछाल था, साथ ही वह घूम भी रही थी। हालांकि, कुछ पिचों पर स्पिनरों को अधिक मदद नहीं मिलती।
आकलैंड और हैमिल्टन के मैदान छोटे हैं, जबकि वेलिंगटन का मैदान भी छोटा है। ऐसे में साइड बाउंड्री को समझना और लाइन-लेंथ बदलना अहम है। हर बार आक्रामक गेंदबाजी करना जरूरी नहीं, मैच की परिस्थिति के अनुसार रक्षात्मक गेंदबाजी भी आनी चाहिए। भारतीय स्पिनरों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
न्यूजीलैंड के विरुद्ध भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए, जहां स्पिन को ज्यादा मदद नहीं मिलती है?
यह कहना सही नहीं कि भारतीय पिचें न्यूजीलैंड के मुकाबले स्पिन को बहुत ज्यादा मदद देती हैं। वहां ज्यादातर मैदानों पर उछाल एकसमान रहता है, जबकि भारत के कुछ हिस्सों में असमान उछाल मिल सकता है।
टी-20 में स्पिनरों का काम आसान नहीं है। अब चार ओवर में 35 या 40 रन देना भी अच्छा प्रदर्शन माना जा सकता है। बल्लेबाज को रणनीतिक रूप से पढ़ना और चतुराई से गेंदबाजी करना जरूरी है।
मिशेल सैंटनर लेंथ और गेंद की दिशा बदलने के अच्छे उदाहरण हैं। दुनिया भर में टी-20 की पिचें आम तौर पर बल्लेबाजी के अनुकूल हैं, गेंदबाजों को हर दिन हालात के हिसाब से रास्ता निकालना होगा।
भारत को पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट खेलने हैं। लंबी सीरीज खिलाड़ियों के लिए कितनी चुनौतीपूर्ण होगी?
ये सही है कि ये सीरीज काफी लंबी है, लेकिन अलग-अलग प्रारूपों में अब कई खिलाड़ी अलग-अलग खेलते हैं। पहले खिलाड़ी लंबे समय तक तीनों प्रारूपों में खेलते थे।
अब आइपीएल का कार्यक्रम लंबा है और टीमों में बदलाव से आराम भी मिलता है। विदेश दौरे खिलाड़ियों को घर से दूर रहकर खुद को हालात के अनुसार ढालना सिखाते हैं।
वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव की टीम में भूमिका क्या हो सकती है?
हाल की सीरीज में कुलदीप के साथ नाइंसाफी हुई। गुवाहाटी में ओस के बीच गेंदबाज के विरुद्ध हालात थे, इसलिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं। वरुण को भी चोट के बाद सर्वश्रेष्ठ फिटनेस और लय हासिल करनी है।
हार्दिक की वापसी नहीं हुई है, इसलिए भारत दो स्पिनरों को खिला पाएगा, यह तय नहीं। मुझे लगता है कि वरुण को फिर प्राथमिकता मिल सकती है। बगल की मांसपेशियों की चोट से लौटना आसान नहीं होता।
न्यूजीलैंड में भारतीय बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
यह कहना कि भारतीय बल्लेबाजों को विदेश में लगातार खुद को साबित करना चाहिए, महज एक धारणा है। जब परिस्थितियां गेंदबाजों के अनुकूल हों, तो किसी भी बल्लेबाज के लिए रन बनाना मुश्किल होता है।
मेरे हिसाब से तकनीक से ज्यादा मानसिक मजबूती और संघर्ष करने की क्षमता मायने रखती है। डीन एल्गर इसका उदाहरण हैं। उनमें मुश्किल परिस्थितियों में टिककर लड़ने का जज्बा था और यही गुण भारतीय बल्लेबाजों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
