नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। पिछले साल आज ही के दिन अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व में टीम इंडिया ने गाबा का घमंड तोड़ा था। टीम ने ब्रिस्बेन के गाबा में आस्ट्रेलिया को हराकर बार्डर-गावस्कर ट्राफी 2-1 से जीती थी। टीम इंडिया के लिए चुनौती आसान नहीं थी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मेजबान टीम आखिरी बार नवंबर 1988 में इस मैदान पर हारी थी। यही नहीं विराट कोहली समेत कई अनुभवी खिलाड़ी भी टीम में नहीं थे। कई मायनों में यह सीरीज टीम इंडिया के लिए यादगार रही थी।

एडिलेड में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने काफी खराब प्रदर्शन किया था। डे-नाइट मुकाबले की दूसरी पारी में टीम इंडिया महज 36 रनों पर सिमट गई थी। उसे आठ विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कप्तान कोहली वापस स्वदेश लौट गए थे। ऐसे में कहा जा रहा था कि टीम इंडिया का 4-0 से क्लीन स्वीप होगा, लेकिन दूसरे टेस्ट में अजिंक्य रहाणे की अगुवाई वाली टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट से जीत दर्ज की। मेलबर्न में खेले गए इस टेस्ट में रहाणे ने शतक जड़ा था। 

इसके बाद सिडनी में खेले गए तीसरे टेस्ट में चोटिल हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन ने जूझारूपन दिखाते हुए मैच ड्रा कराया। दोनों जब क्रीज पर थे तब भारतीय टीम बैकफुट पर थी। हनुमा विहारी और अश्विन ने 258 गेंदों तक बल्लेबाजी की। हैमस्ट्रिंग की चोट के बावजूद विहारी ने नाबाद 161 गेंदों में 23 रन बनाए, जबकि अश्विन ने 128 गेंदों में 39 रन बनाए। जीत के लिए 400 से अधिक रनों की जरूरत थी। पंत और पुजारा ने शानदार बल्लेबाजी की। बाएं हाथ के पंत ने 97 रनों की तेज पारी खेली और वह थोड़ी देर और क्रीज पर रह गए होते तो मैच का परिणाम कुछ भी हो सकता था। 

चौथे टेस्ट से पहले हनुमा विहारी और रवींद्र जडेजा चोटिल हो गए थे। इसके बाद जसप्रीत बुमराह और रविचंद्रन अश्विन भी चोटिल हो गए। इसके बाद वाशिंगटन सुंदर, टी नटराजन और शार्दुल ठाकुर को मौका मिला और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। विराट कोहली के बिना गाबा विकेट पर अंतिम पारी में जीत के लिए 328 रनों का पीछा करना कोई आसान उपलब्धि नहीं है। मैच में शुभमन गिल ने 91, रिषभ पंत ने 89 और चेतेश्वर पुजारा ने 56 रन बनाए। वाशिंगटन सुंदर के 22 और अजिंक्य रहाणे के 24 योगदान दिया। पुजारा के इस पारी काफी तारीफ हुई थी। उन्हें वारियर कहा गया। पारी में उऩ्होंने काफी गेंदे शरीर पर झेली।

Edited By: Tanisk