नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष सौरव गांगुली के पद पर बने रहने पर सवाल खड़ा उठाया गया है। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) में खुद को आजीवन सदस्य और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ झारखंड में खुद को कोषाध्यक्ष बताने वाले नरेश मकानी ने अध्यक्ष गांगुली और सचिव जय शाह के साथ ही बोर्ड के लोकपाल डीके जैन को कटघरे में खड़ा किया है।

मकानी के अनुसार, उनके पद पर बने रहना बीसीसीआइ के नए संविधान के खिलाफ है। मकानी ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में गांगुली और शाह के पदों पर बने रहने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होनी थी, लेकिन कोर्ट ने इस सुनवाई को अब अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है। शीर्ष परिषद के फैसला लेने तक यह दोनों पद पर बने रहेंगे।

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मकानी ने अपनी शिकायत में लिखा कि बीसीसीआइ के नए संविधान के अनुसार, बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव को अभी तक अपने पदों से हट जाना चाहिए था। शाह ने तो अपने पद के समय से काफी अधिक समय बिता लिया है। मकानी ने कहा कि गुजरात क्रिकेट संघ के अधिकारी रहने हुए जय ने पांच वर्ष से अधिक समय बिताया, इसके बाद वह बीसीसीआइ के सचिव भी रहे। ऐसे में उन्होंने एक अधिकारी के तौर पर कुल छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। ऐसा ही गांगुली के साथ भी है।

मकानी ने कहा कि शाह और गांगुली पहले ही अपना समय पूरा कर चुके हैं और वह अभी भी बीसीसीआइ की बैठक में भाग ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें अब तो आइपीएल के बारे में भी फैसले लेने का हक नहीं है। यह बीसीसीआइ के संविधान के विरुद्ध है। 

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