नई दिल्ली, जेएनएन। कहते हैं मुश्किल वक्त में ही इंसान का असली चरित्र निखर कर आता है और भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने इसे सौ फीसदी सही साबित किया। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर इस गेंदबाज ने जिस तरह का प्रदर्शन दिया वह एक नए सितारे के जन्म की तरफ इशारा कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के कुछ दिन बात ही अपने पिता को खोने वाले सिराज ने सीरीज में ऐसी गेंदबाजी की जिसे ताउम्र याद रखा जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में मोहम्मद शमी चोटिल होकर सीरीज के बाहर हुए। मेलबर्न में टेस्ट डेब्यू करने वाले सिराज को अपने तीसरे ही मैच में टीम के गेंदबाजी की कमान संभालने का मौका दिया गया। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने दूसरी पारी में 5 विकेट हासिल कर भारत के लिए मैच बना दिया। सीरीज में 3 मैच खेलने वाले सिराज ने कुल 13 विकेट चटकाए जिसमें ब्रिसबेन की दूसरी पारी में 73 रन देकर 5 विकेट सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।

पिता के निधन के बाद पूरा किया उनका सपना

इंडियन प्रीमियर लीग खेलने के बाद दुबई से ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के कुछ दिन बात ही सिराज को पिता के नहीं रहने की दुखभरी खबर मिली। बायो बबल में होने की वजह से वह पिता के अंतिम दर्शन के लिए भारत नहीं लौटे। बीसीसीआइ ने उनको देश लौटने का विकल्प दिया था लेकिन पिता का सपना पूरा करने के सिराज ऑस्ट्रेलिया में ही रुके। सिराज के भाई ने बताया था कि उनके पिता चाहते थे कि बेटा भारत की तरफ सफेद जर्सी में मैदान पर उतरे। सिराज ने अपने पिता के सपने को पूरा किया और इसी वजह से वह सिडनी टेस्ट में राष्ट्रगान सुनकर रो पड़े थे।

दर्शकों ने कहे अपशब्द

ऑस्ट्रेलिया सीरीज के दौरान सिराज के उपर मैच देखने आए दर्शकों ने नस्लीय टिप्पणी की। इस बात की शिकायत उन्होंने अंपायर से की और इसको लेकर एक्शन भी लिया गया। हालांकि दर्शक नहीं सुधरे और अगले ही मैच में फिर से उनको लेकर अशब्द कहे गए। इस सब के बाद भी सिराज ने खुदको मजबूत बनाया और एक ऐसा प्रदर्शन किया जिसने भारत के ऐतिहासिक जीत की नींव रखी।

 

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