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    तिहरा शतक ठोकने के बाद भी टीम से बाहर होने वाले बल्लेबाज ने कहा- सोचा नहीं था ऐसा होगा

    By Vikash GaurEdited By:
    Updated: Mon, 15 Jun 2020 01:50 PM (IST)

    भारतीय बल्लेबाज करुण नायर ने बताया है कि जब मुझे तिहरा शतक ठोकने के बाद भी टीम से बाहर कर दिया था तो उन्होंने राहुल द्रविड़ से बात की थी।

    तिहरा शतक ठोकने के बाद भी टीम से बाहर होने वाले बल्लेबाज ने कहा- सोचा नहीं था ऐसा होगा

    नई दिल्ली, जेएनएन। कुछ पारियां क्रिकेट में इतनी शानदार होती हैं कि वो इतिहास बन जाती हैं। साल 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर बैट्समैन करुण नायर की तीसरी टेस्ट मैच की पहली पारी भी ऐसी ही एक पारी थी। सिर्फ तीन सत्रों में नाबाद 303 रनों की पारी खेलकर वे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज तिहरा शतक बनाने वाले बल्लेबाज बन गए थे। वह मैच भारत ने एक पारी से जीता थी और करुण नायर 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए थे।

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    वहीं, जब हम किसी के करियर की हाइलाइट्स को देखते हैं तो उसके पहले और बाद में होने वाली घटनाओं के बारे में अक्सर हमें कुछ खास पता नहीं चल पाता। करुण नायर याद करते हुए बताते हैं, "मुझे याद है, मेरे माता-पिता मैच के दौरान स्टेडियम में थे। जब मैंने अपना तिहरा शतक बनाया तो उन लोगों को मीडिया से घिरा पाया। मेरी मां को इस तरह के दबाव की बिल्कुल भी आदत नहीं थी, इसलिए वे किसी तरह लोगों की भीड़ से बाहर निकलीं, लेकिन बाद में जब मैं अपने माता- पिता से मिला तो वे खुशी से नाच रहे थे। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैंने इतनी शानदार शुरुआत की है।"

    इसके बाद कोई भी यही सोचेगा कि इस तरह की प्रतिभा के कारण करुण नायर कुछ दिनों तक भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा रहेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करुण नायर को जल्द ही पता चल गया कि अंतिम टेस्ट 11 में उन्हें नहीं रखा गया है। यहां तक कि वे भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर भी गए, लेकिन उन्हें एक मैच भी खेलने का मौका नहीं मिला। ऐसी ही कुछ यादों को करुण नायर ने क्रिकबज के एक स्पेशल शो में बताया है।

    नायर बताते हैं, "इंग्लैंड के दौरे के दौरान मैंने बहुत ज्यादा नहीं बोला। मुझे याद है मेरे पिता जी मुझे लगातार फोन करते और पूछते कि मैं क्यों नहीं खेल रहा हूं और मेरे पास उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। जब दौरा खत्म हुआ तो मैंने अकेले में राहुल द्रविड़ से बात की। बीते वर्षों में, हम बहुत करीब आ गए थे और वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें मैं खुले मन से सुनता हूं और यकीन करता हूं कि वे मुझे सही सलाह देंगे।"

    अपनी असफलता पर नायर ने कहा है, "मेरा मानना है कि जीवन में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें भूल कर आपको आगे बढ़ना चाहिए। बेशक, वह कुछ समय तक आपके साथ रहती है, लेकिन जब तक आप अतीत को भूलेंगे नहीं, उससे पूरी तरह से बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक आप कभी भी आगे नहीं बढ़ सकेंगे। इसलिए इस सत्र के लिए मेरा लक्ष्य बहुत ही साधारण सा है, मैं पूरे लगन के साथ रणजी ट्रॉफी में खेलना चाहता हूं, बिल्कुल वैसे जैसा कि यह फिर से मेरा डेब्यू सीजन हो।"