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    भारतीय बैडमिंटन प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद का ऋणी रहेगा- सुनील गावस्कर

    गावस्कर ने कहा कि प्रकाश और पुलेला ने सीखा और खेल से संन्यास लेने के बाद खेल अकादमी की स्थापना की जो पहले से कहीं ज्यादा भारतीयों को विदेशों में जीत दिला रहे हैं। भारतीय बैडमिंटन हमेशा के लिए इन दो विनम्र चैंपियनों का ऋणी रहेगा।

    By Sanjay SavernEdited By: Updated: Mon, 16 May 2022 07:57 PM (IST)
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    टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर (एपी फोटो)

    (सुनील गावस्कर का कालम)

    कई क्रिकेट प्रशंसक हैं जो इस बात से बैचेन हैं कि गुजरात टाइटंस के साथ आइपीएल के प्लेआफ में कौन सी टीम जगह बनाएगी, लेकिन इसी बीच बैडमिंटन टीम ने थामस कप में इतिहास रच दिया। प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद ने हमारे बैडमिंटन की प्रगति की है। इन्होंने अकादमी खोली और युवा प्रतिभाओं को निखारा। जब ये लोग खेलते थे तो ट्रेनिंग, तरीके या मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं।

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    प्रकाश और पुलेला ने सीखा और खेल से संन्यास लेने के बाद खेल अकादमी की स्थापना की, जो पहले से कहीं ज्यादा भारतीयों को विदेशों में जीत दिला रहे हैं। भारतीय बैडमिंटन हमेशा के लिए इन दो विनम्र चैंपियनों का ऋणी रहेगा। जब वे खेल रहे थे तब भी और अब युवाओं की मदद करने व प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए भी ऋ णी रहेगा। उदय पवार जैसे अन्य दिग्गज भी हैं जिन्होंने अपना जीवन युवाओं को कोचिंग और कई अन्य पुरुषों और महिलाओं को समर्पित कर दिया। उन्होंने भले ही बहुत अधिक पदक नहीं जीते हों, लेकिन शीर्ष स्तर पर खेले हैं और अब अपना अनुभव युवाओं को दे रहे हैं।

    क्रिकेट में भी गर्मी की छुट्टियों का मतलब कोचिंग कैंप होता है और मुंबई में अगर कोई क्रिकेट के लिए इस जुनूनी शहर के मैदानों पर नजर डालें तो आप पाएंगे कि युवा अपने-अपने कोचों के साथ कोचिंग ले रहे होते हैं। इनमें से कई कोचों ने रणजी स्तर तक क्रिकेट नहीं खेला है, लेकिन वे अपना काम अच्छे से कर रहे हैं और युवाओं को तैयार कर रहे हैं। इनमें से ही अगले सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा हो सकते हैं। कई पत्रकार ऐसे भी हैं जो कभी-कभी केवल मैदान बीट को ही कवर करते हैं और वे भी प्रतिभाओं को पहचानने और चयनकर्ताओं को उनके बारे में जानकारी देने में अविश्वसनीय योगदान देते हैं।

    ब्रेंडन मैकुलम को इंग्लैंड की टेस्ट टीम का कोच बनने पर बधाई। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड के खाके का अनुसरण कर रही है। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर स्टोक्स और मैकुलम की जोड़ी इंग्लैंड की लाल गेंद के क्रिकेट को ऊंचाई पर ले जाए।