नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट टीम (Indian cricket team) के कप्तान MS Dhoni ने टीम इंडिया (Team India) को 2007 में पहली बार आयोजित की गई टी20 विश्व कप (T20 world cup 2007) का खिताब दिलाया था। फाइनल मैच में धोनी ने गेंद एक ऐसे गेंदबाज को सौंपी जो रेगुलर गेंदबाज नहीं था और फिर वो कमाल हुआ जो इतिहास बन गया। टी20 वर्ल्ड कप 2007 आइसीसी का पहला टूर्नामेंट था जिसमें बॉल आउट नियम को पहली बार शामिल किया गया था।  

भारत को 2007 टी20 विश्व कप के पहले ही मुकाबले में इस नियम से रूबरू होने का मौका भी मिल गया। भारत ने इस टूर्नामेंट में पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था और ये मुकबला टाई रहा था। दोनों ही टीमों ने इस मैच में 141 रन बनाए थे। इसके बाद बारी आई बॉल आउट कि जिसके लिए भारत की तरफ से तीन स्पिनर रॉबिन उथप्पा, वीरेंद्र सहवाग व हरभजन सिंह को चुना गया था। वहीं पाकिस्तान ने इसके लिए यासिर अराफात, उमर गुल व शाहिद अफरीदी का चयन किया था। आखिर में नतीजा 3-0 के अंतर से भारत के पक्ष में रहा था। 

आखिर 2007 टी20 विश्व कप में लाए गए नए नियम बॉल आउट की तैयारी टीम इंडिया ने किस तरह से की थी इसका जिक्र MS Dhoni ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान किया। उन्होंने बताया कि हम जब भी नेट प्रैक्टिस करते थे इसकी शुरुआत और अंत बॉल आउट की प्रैक्टिस के साथ ही करते थे। ये पहला मौका था जब इस तरह से नियम को टूर्नामेंट में शामिल किया गया था। हमने ये फैसला किया कि जो भी खिलाड़ी सबसे ज्यादा अपनी गेंद को स्टंप पर मारेगा वो इस तरह की परिस्थिति सामने आने की बाद टीम का प्रतिनिधित्व करेगा। ये हमारे लिए एक फन की तरह था। पर जब मौका आया तब हमने टीम के रेगुलर गेंदबाजों का चयन नहीं करके उसे चुना जो हमें बेस्ट रिजल्ट दे सकता था। हम ऐसी स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार थे ठीक उसी तरह जैसे हम टी20 विश्व कप के लिए तैयार थे। 

MS Dhoni ने कहा कि कोई एक खिलाड़ी अकेला पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता। क्रिकेट टीम गेम है और इसमें हर खिलाड़ी को प्रदर्शन करना चाहिए। मेरे इसी विश्वास की वजह से हमने टी20 विश्व कप जीता था। हमने इस दौरान शानदार कैच पकड़े, रन आउट किया और टीम वर्क की वजह से हमने ये सफलता हासिल की।  

Posted By: Sanjay Savern

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