छत्तीसगढ़ के मध्य में बहती महानदी के प्रवाह की तरह लहलहाते रायपुर को धान का कटोरा कहा जाता है। साल 2000 की सर्दियों में हिंदुस्तान के 26वें राज्य के रूप में आकार लेने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी अब नया रायपुर है। रायपुर खारुन नदी के तट पर बसा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शहर है। इसके पूर्व में महानदी बहती है, तो उत्तर पश्चिम में यह मैकाल की पहाड़ियों से घिरा है।

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उत्तरी ओर छोटा नागपुर का पठार है, तो दक्षिण में बस्तर का पठार रायपुर को अपनी गोद में बिठाए हुए है। यहां बरसात जमके होती है, तो गर्मी में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है।

प्राकृतिक संसाधनों से भरा यह धान का कटोरा व्यापार और निवेशकों को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचता है। उर्वरा भूमि का स्वामी रायपुर शहर बलौदा बाजार, गरियाबंद, दुर्ग और महासमुंद जैसे जिलों के बीच स्थित है। खारुन, शिवनाथ और अन्य छोटी-छोटी नदियां महानदी में गिरती हैं, और ये रायपुर के लिए वरदान की तरह है।

कहा जाता है कि इस शहर की स्थापना ब्रह्मदेव राय ने की थी और इस उनका नाम भी इस शहर को मिला। इसके साथ ब्रह्मदेव राय ने हटकेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना भी कराई। हालांकि राजा अमर सिंह देव के निधन के बाद इस वंश का शासन क्षीण होता गया।

राजा की मौत के बाद भोंसले राजाओं को इस क्षेत्र पर राज करने का मौका मिला। ब्रिटिश भारत में रायपुर का शासन कमिश्नर के हाथों में था। आजादी के बाद रायपुर की परिधि भी बदली और 53 सालों बाद 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य ने अपना अलग आकार लिया।

9वीं से 14वीं सदी के बीच बसे रायपुर की पुरानी बसाहट पुरानी बस्ती तंग गलियों के बीच अपने इतिहास को आज भी ताजा रखती है। गलियों से निकल कर जीई रोड, गौरव पथ पर आएंगे तो चमचमाती सड़कें आधुनिक युग में ले आती हैं। संपूर्ण भारतवासियों को समेटे रायपुर अपने सौम्य, सरल लोगों के लिए जाना जाता है।

मौजूदा रायपुर शहर से 24 किमी की दूरी पर सरकार एक नया रायपुर बसा रही है। साल 2014 में ही सरकारी मंत्रालय शिफ्ट किए गए हैं। यह एक बड़ी योजना का हिस्सा है। इसके लिए 80 हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। नए शहर में 225 किमी नई पक्की सड़कों का जाल बिछाया जाना है।

राज्य सरकार ने देश के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दर्शाने वाला पुरखौती मुक्तांगन भी नया रायपुर में बनवाया है।

समय के साथ रायपुर में खदानों की खोज होती रही और यह धीरे-धीरे औद्योगिक क्षेत्र बनता गया। यहां की आर्थिकी कृषि, सेवा और कोयला आधारित है। बिजली उत्पादन के मामले में राज्य अग्रणी है और यह अन्य राज्यों को बिजली बेचता है। हजारों लोग हर रोज रायपुर अपनी आजीविका कमाने आते हैं।

पर्यटन के लिहाज से रायपुर का सबसे बड़ा आकर्षण नगरघड़ी है। ये घड़ी हर घंटे छत्तीसगढ़ी लोकधुनें सुनाती है। यहां के सभी झूले सौर ऊर्जा से चलते हैं। बूढ़ा तालाब रायपुर का सबसे बड़ा तालाब है, जिसे अब विवेकानंद सरोवर के नाम मिल गया है।

बूढ़ा तालाब के मध्य में एक द्वीप है, जिस पर उद्यान बना हुआ है। आधुनिकता और परंपरा का मेल रायपुर शहर में भगवान राम का पांच सौ पुराना मंदिर भी है। दूधधारी मंदिर के साथ महंत घासीदास संग्रहालय और राजीव गांधी ऊर्जा पार्क भी देखें जा सकते हैं।

जल, जंगल के मामले में छत्तीसगढ़ बहुत ही धनी है। अगर जानवरों से प्रेम है, तो जीई रोड पर गांव सरोना में स्थित नंदन वन में जंगली जानवरों को भी देखा जा सकता है।

रायपुर के खास आकर्षण

600 साल पुराना बूढ़ा तालाब- शहर के बीच फैला विशालकाय तालाब रायपुर की शान है। सरोवर के बीच है स्वामी विवेकानंद की विशाल मूर्ति, जो बगीचे पर विराजमान है।

स्वामी विवेकानंद को भाया रायपुर- बूढ़ापारा में है डे भवन। इसी भवन में स्वामी विवेकानंद 1877 से 1879 तक अपने पिता के साथ रहे। यह भवन आज ऐतिहासिक महत्व का बन चुका है।

केसर ए हिंद दरवाजा- शहर के सबसे बड़े मार्केट मालवीय रोड पर स्थापित है यह दरवाजा। विकास की दौड़ के बीच यह दरवाजा आज भी सुरक्षित है, आजादी की लड़ाई की निशानी।

जयस्तंभ चौक- रायपुर का हृदय स्थल है। क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह को इसी जगह पर अंग्रेजों ने 1910 में सरेआम मौत की सजा दी थी।

दूधाधारी मठ- पांच सौ साल पुराना राम मंदिर। कहा जाता है कि श्रीराम रायपुर से होकर दंडकारण्य की ओर गए थे।

महंत घासीदास संग्रहालय- राजनांदगांव के राजा के नाम पर स्थापित है यह म्यूजियम इतिहास के झरोखों को समेटे हुए है।

नगर घड़ी- शहर का एकमात्र सबसे बड़ा घंटाघर। हर घंटे सुनाई देता है छत्तीसगढ़ी संगीत का धुन।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम- भारत में ईडन गार्डन के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम भी रायपुर में है।

छत्तीसगढ़ी व्यंजन है खास- शुद्ध छत्तीसगढ़ी भोजन मिलेगा गढ़कलेवा में। घासीदास संग्रहालय परिसर में यहां रोजाना भोजन के साथ नमकीन व मीठे छत्तीसगढ़ी व्यंजन मिल जाएंगे। ठेठरी, खुर्मी से लेकर अनरसा, पपची मुंह में पानी ला देते हैं।

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By Nandlal Sharma