रायपुर /नईदिल्ली, ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसग़ढ सरकार को आदेश दिया कि आदिवासी युवक सामनाथ बघेल की हत्या के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर व अन्य के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले चार हफ्ते का नोटिस दें। न्यायमूर्ति एमबी लोकुर व आदर्श गोयल की पीठ ने नंदिनी व अन्य को यह छूट दी है कि अगर उन्हें कार्रवाई करने संबंधी नोटिस मिलता है तो वे कोर्ट में याचिका लगाने को स्वतंत्र हैं।

कोर्ट ने इस संबंध में छत्तीसग़ढ सरकार के उस आश्वासन को रिकॉर्ड किया है जिसमें कहा गया है कि डीयू की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जेएनयू की अर्चना प्रसाद तथा अन्य को न तो फिलहाल गिरफ्तार किया जाएगा न पूछताछ होगी। हालांकि कोर्ट ने नंदिनी की यह दलील मानने से इंकार किया कि इस केस में उनसे या अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने या पूछताछ करने से पहले राज्य सरकार को कोर्ट से अनुमति लेनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा- 'नहीं, उन्हें हमेशा के लिए नहीं रोका जा सकता। यदि कोई अपराध हुआ है तो उन्हें कार्रवाई करने की जरूरत है। यह उनका वैधानिक अधिकार है। वे पहले आपको नोटिस देंगे और उसके बाद कार्यवाही करेंगे।'

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पेश वकील वृृंदा ग्रोवर ने नईदुनिया को बताया कि सुनवाई शुरू होते ही छत्तीसग़ढ सरकार की ओर से मामला देख रहे एडिशनल सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि फिलहाल नंदिनी और अन्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। नंदिनी का केस ल़ड रहे वकील अशोक देसाई ने इस पर मीडिया में छपी उन खबरों को कोर्ट के सामने पेश किया, जिसमें बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी के हवाले से कहा गया है कि अगर नंदिनी दोबारा बस्तर आईं तो उन पर पत्थर से हमला किया जाएगा। कोर्ट ने मेहता से पूछा कि क्या आपका बयान रिकॉर्ड किया जाए। मेहता ने रिकॉर्डेड बयान में कहा अभी इस मामले में नामजद सभी छह आरोपियों में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसके पहले कोर्ट ने 11 नवंबर को छत्तीसग़ढ सरकार का यह बयान रिकॉर्ड किया था कि सुंदर और अन्य के खिलाफ 15 नवंबर तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य से कहा था कि नक्सल समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए जीवन के प्रति व्यवहारिक रवैया अपनाए।
ज्ञात हो कि 4 नवंबर की रात तोंगपाल क्षेत्र में कुमाकोलेंग ग्राम पंचायत के नामा गांव में हथियारबंद नक्सलियों ने सामनाथ बघेल की हत्या कर दी थी। बघेल के नेतृृत्व में आदिवासी टंगिया ग्रुप बनाकर अप्रैल से ही गांव में नक्सलियों का विरोध कर रहे थे। इसी गांव में मई में प्रोफेसरों के दल ने दौरा किया था। तब से उन पर आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्होंने ग्रामीणों को नक्सलियों का साथ देने को उकसाया था।
मामले में बघेल की पत्नी की शिकायत पर सुंदर, अर्चना प्रसाद, विनीत तिवारी, संजय पराते [ माकपा के छत्तीसग़ढ राज्य सचिव ] मंजू कवासी व मंगलराम कर्मा के खिलाफ तोंगपाल पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 120बी , 302 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

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Posted By: Bhupendra Singh

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