Iran Israel War: कांडला-मुंद्रा पोर्ट पर अटका भारत का 1 लाख टन बासमती चावल, करोड़ों का नुकसान तय?
अमेरिका के ईरान-इजराइल संघर्ष में औपचारिक रूप से कूदने के बाद मध्य पूर्व में बहुत ज्यादा खलबली मच गई है। अमेरिका ने 22 जून को ईरान की परमाणु साइट्स पर हमला करने के लिए सात B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स भेजे, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस तनाव का असर अब भारत के बासमती चावल के निर्यात पर भी दिखने लगा है।

नई दिल्ली। अमेरिका के ईरान-इजराइल संघर्ष में औपचारिक रूप से कूदने के बाद मध्य पूर्व में बहुत ज्यादा खलबली मच गई है। अमेरिका ने 22 जून को ईरान की परमाणु साइट्स पर हमला करने के लिए 7 B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स भेजे, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस तनाव का असर अब भारत के बासमती चावल के निर्यात पर भी दिखने लगा है।
भारत से ईरान भेजे जाने वाले करीब 1 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल कांडला और मुंद्रा पोर्ट्स पर फंसे हुए हैं, क्योंकि जहाज अब ईरान की ओर रवाना नहीं हो रहे। कोई भी बीमा कंपनी युद्ध क्षेत्र में जाने वाले जहाजों को कवर नहीं कर रही है, इसलिए कोई भी जहाज ईरान की तरफ नहीं जा रहा। इससे हमारी सप्लाई चेन रुक गई है । उन्होंने आगे कहा कि निर्यातक भारत सरकार के संपर्क में हैं, लेकिन अभी "वेट एंड वॉच" की स्थिति है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
सतीश गोयल, ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से होगा भारी नुकसान
गोयल ने चिंता जताई कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो इसका असर सिर्फ ईरान नहीं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारत के चावल निर्यात पर पड़ेगा। भारत से बासमती और नॉन-बासमती चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, यमन, जॉर्डन, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों में जाता है। बासमती चावल के कुल निर्यात का करीब 80% हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है, और अकेले ईरान को 35% बासमती चावल एक्सपोर्ट होता है।
ईरान को बासमती निर्यात में भारत की बड़ी हिस्सेदारी
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में अब तक भारत ने ईरान को $753 मिलियन का बासमती चावल निर्यात किया है। जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा $681 मिलियन था। वहीं 2022-23 में $980 मिलियन का निर्यात हुआ था।
अब आगे क्या?
अगर मौजूदा हालात ज्यादा दिनों तक बने रहते हैं, तो भारत के चावल कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में बासमती चावल की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा, जिससे वहां के बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं।
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