नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट निवेश के दो अच्छे विकल्प हैं। पीपीएफ में निवेश से ना सिर्फ टैक्स बेनेफिट्स मिलते हैं बल्कि यह एक सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखता है। पीपीएफ में निवेश, ब्याज दर और मैच्योरिटी पर मिली रकम टैक्स फ्री होती है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सरकार ने इन दोनों पर ब्याज दर को 7.6 फीसद से 8 फीसद कर दिया है।

एनएससी पर ब्याज दर सालाना चक्रवृद्धि होती है लेकिन मैच्योरिटी के समय बिना किसी टीडीएस कटौती के भुगतान की जाती है। एनएससी में आप 100 रुपये के न्यूनतम राशि से निवेश कर सकते हैं जबकि अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है।

पीपीएफ: पीपीएफ का लोगों के बीच पापुलर होने का कारण इस पर लगातार बढ़ती ब्याज दर और टैक्स फ्री रिटर्न है। यह एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट कैटेगरी में आता है लिहाजा इसमें निवेश पर आपको कोई कर नहीं देना होता है। पीपीएफ के नियमों के मुताबिक इस विकल्प में सालाना न्यूनतम निवेश की सीमा 500 रुपये है। वहीं इसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख तक जाती है। जैसा कि पीपीएफ अकाउंट 15 साल के लॉक इन पीरियड के साथ आता है। लेकिन फिर भी यह फंड से आंशिक निकासी की सुविधा देता है। पीपीएफ अकाउंट एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट कैटेगरी में आता है, लिहाजा इसमें लॉक इन पीरियड से पहले की जाने वाली कोई भी निकासी कर के दायरे से बाहर होती है। हालांकि आईटीआर फाइलिंग के दौरान आपको इसका उल्लेख करना होता है कि आपने पीपीएफ खाते से निकासी की है।

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट: नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में किया गया निवेश आयकर की धारा 80C के अंतर्गत कर छूट प्राप्त करने योग्य होता है। आयकर की धारा 80C के अंतर्गत आप एक वित्त वर्ष के दौरान 1.5 लाख रुपये की कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। एक 100 रुपये का एनएससी आपको पांच वर्षों बाद मैच्योरिटी पर 146.93 रुपये दे सकता है। नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में पांच वर्षों का लॉक इन पीरियड होता है। एनएससी खाता खोलने के लिए आप 100 रुपये या फिर इसके गुणकों में न्यूनतम निवेश के साथ शुरुआत कर सकते हैं। वहीं एनएससी में निवेश की कोई उच्चतम सीमा नहीं है। 

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