नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। दुनियाभर को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले ओपेक देश जब 6 दिसंबर की अपनी बैठक की तैयारियों में व्यस्त हैं, इस बीच कतर के एक फैसले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। प्रोडक्शन कट की जद्दोजहद के बीच कतर ने ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) देशों से बाहर आने का फैसला किया है। कतर के इस फैसले की भारत के साथ साथ दुनियाभर के व्यापार पर असर पड़ने की संभावनाएं तेज होने लगी हैं।

कतर का फैसला?

साद शेरिदा अल-काबी, जो कि कतर के ऊर्जा मंत्री हैं ने बताया कि ओपेक को इस फैसले के संबंध में सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा कि ओपेक से बाहर निकलने के फैसले का असर कतर के नैचुरल गैस प्रोडक्शन बढ़ाने के उद्देश्य पर पड़ सकता है। कतर हर साल 77 मिलियन टन नैचुरल गैस का प्रोडक्शन करता है और वो इसे 110 मिलियन टन तक पहुंचाना चाहता है। कतर का फैसला जनवरी 2019 से प्रभावी होगा।

कतर के इस फैसले का दुनिया पर असर?

वर्तमान में क्रूड की कीमतें लगातार गिर रही हैं और इसकी प्रमुख वजह प्रोडक्शन की भरमार है, जबकि दुनियाभर में मांग उतनी नहीं है। रुस और अमेरिका पहले से ही प्रोडक्शन कट के फैसले पर सहमति जताने को तैयार नहीं है, वहीं कतर के ओपेक से अलग होने से दुनियाभर में प्रोडक्शन को लेकर अनिश्चितता आ जाएगी।

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के प्रमुख रवि सिंह ने कहा, ''यह अनिश्चितता ट्रेड को लेकर और तनावपूर्ण माहौल बनाने का काम करेगी।'' उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर के बाद कंपनिया प्रोडक्शन को लगभग बंद कर देती हैं जिसकी वजह ठंड के मौसम की अनिश्चितता होती है। जैसा कि हाल ही में देखा जा रहा है कि डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें स्थायित्व की ओर लौट रही हैं, वहीं कतर के इस फैसले से कच्चे तेल कीमतें एक बार फिर से तेज सुधार दिखा सकती हैं। कतर को क्रूड में संभावनाएं ज्यादा नजर नहीं आ रही हैं वो फिलहाल अपना ध्यान नैचुरल गैस के प्रोडक्शन को बढाने में लगा सकता है।

कतर के फैसले का भारत पर असर?

कतर के इस फैसले का भारत पर भी बड़ा असर दिखाई दे सकता है। सिंह ने कहा, ''कतर के इस फैसले के आधिकारिक व्यापार के मुश्किल में पड़ने की संभावना है। क्रूड वर्तमान में भारत को डिस्काउंट पर मिल रहा है लेकिन भारत में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से उछाल मार सकती हैं।''

जानकारी के लिए आपको बता दें कि कतर नेचुरल गैस का बड़ा स्रोत है और वो भारत को बड़े पैमाने पर गैस सप्लाई करता है। भारत में नैचुरल गैस की कीमतें हाल ही में 18 फीसद का उछाल दिखा चुकी हैं और इस फैसले से इसमें 5 से 10 फीसद के और उछाल की संभावना नजर आ रही है।

कतर के फैसले का ओपेक पर असर?

केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि कतर का ऑयल प्रोडक्शन सिर्फ 6 लाख बैरल का है। वह सबसे ज्यादा एलएनजी का निर्यात करता है। कतर का ओपेक से बाहर निकलना अनिश्चितता को बढ़ा सकता है, क्योंकि कतर यह कह सकता है कि बाहर निकलने के बाद वो अपना प्रोडक्शन बढ़ा सकता है। इसलिए कतर का एग्जिट ओपेक के लिए अच्छा नहीं है। 6 दिसंबर की होने वाली बैठक में ओपेक देशों के बीच 1.4 मिलियन बैरल प्रोडक्शन कम करने की बात पर सहमति बन सकती है। ओपेक देशों के लिए सबसे मुश्किल चुनौती अमेरिका बन चुका है। आज के समय में अमेरिका काफी ज्यादा मात्रा में तेल उत्पादन कर रहा है। हालांकि इससे ओपेक के प्रोडक्शन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि कतर का प्रोडक्शन सिर्फ 6 लाख बैरल का ही है और वो ओपेक में सबसे छोटा तेल निर्यातक है।

Posted By: Praveen Dwivedi