यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Tata Capital IPO: आ रहा टाटा ग्रुप का सबसे बड़ा आईपीओ, टाटा टेक्नोलॉजीज से 5x ज्यादा, बाजार का चौथा बड़ा इश्यू
टाटा कैपिटल इस साल अक्टूबर के पहले पखवाड़े में अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ ला सकती है। टाटा कैपिटल का यह आईपीओ ...और पढ़ें

नई दिल्ली। टाटा समूह का एक और आईपीओ शेयर बाजार में दस्तक देने जा रहा है। खास बात है कि यह इस साल का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा, जिसकी साइज 2 अरब डॉलर यानी 17000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शेयर बाजार में इस इश्यू को सूचीबद्ध करने के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद टाटा कैपिटल अक्टूबर के पहले पखवाड़े (15 अक्टूबर तक) में अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ ला सकती है।
इससे पहले, टाटा समूह की इस नॉन-बैकिंग गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने के लिए 30 सितंबर की समय-सीमा दी गई थी। कंपनी अपने इश्यू के ज़रिए 18 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर 2 अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, जब अप्रैल में टाटा कैपिटल द्वारा आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए गए थे उस समय वैल्युएशन 11 अरब डॉलर था।
चौथा सबसे बड़ा आईपीओ
खास बात है कि टाटा कैपिटल का यह आईपीओ, शेयर बाजार के इतिहास का चौथा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा। इससे पहले हुंडई (27,870 करोड़), एलआईसी (21000 करोड़) और पेटीएम आईपीओ (18300 करोड़) जैसे बड़े पब्लिक इश्यू आ चुके हैं। लेकिन, इन सभी आईपीओ ने लिस्टिंग पर ज्यादा अच्छा गैन नहीं दिया। हालांकि, निचले स्तरों से इन कंपनी के आईपीओ में जबरदस्त उछाल आ चुका है।
कितना बड़ा है Tata Capital IPO
टाटा कैपिटल का यह इश्यू अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर (27,870 करोड़ रुपये) के आईपीओ के बाद देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा, साथ ही नवंबर 2023 में टाटा टेक्नोलॉजीज के आईपीओ के बाद हाल के वर्षों में टाटा समूह की दूसरी कंपनी की लिस्टिंग होगी। खास बात है कि टाटा कैपिटल का आईपीओ टाटा टेक्नोलॉजीज के इश्यू से 5 गुना बड़ा होगा। यदि यह सफल रहा, तो यह IPO भारत के वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा।
इसमें प्रमोटर टाटा संस 23 करोड़ शेयर तक बेचेगा, जबकि इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) 3.58 करोड़ शेयर बेचेगा। वर्तमान में, टाटा कैपिटल में टाटा संस की 88.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि IFC के पास 1.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस आईपीओ से मिलने वाली रकम का उपयोग टियर-1 पूंजी बढ़ाने और लोन ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
