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करेंसी बाजार को सेबी का 'बूस्टर डोज': डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियम हुए आसान, 5 मिलियन डॉलर की लिमिट तय

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Thu, 05 Nov 2026 11:04 PM (IST)Updated: Thu, 05 Nov 2026 11:06 PM (IST)

सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स नियमों में ढील देते हुए अनहेजेड करेंसी पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा तय ...और पढ़ें

करेंसी डेरिवेटिव्स में अनहेजेड पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा।

करेंसी डेरिवेटिव्स में अनहेजेड पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा।

HighLights

  1. करेंसी डेरिवेटिव्स में अनहेजेड पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा।

  2. घरेलू निवेशकों और एफपीआई को भारतीय वित्तीय बाजारों में आसानी।

  3. विदेशी निवेशकों के लिए केवाईसी प्रक्रिया अब डिजिटल माध्यम से।

आईएएनएस, मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने करेंसी डेरिवेटिव्स नियमों में सख्ती को कम करते हुए अनहेजेड करेंस पॉजिशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा तय कर दी है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी सर्कुलर में दी गई।

इस फैसले से घरेलू निवेशक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) 5 मिलियन डॉलर तक की अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन ले सकेंगे। यह 5 मिलियन डॉलर की सीमा किसी भी समय के आउटस्टैंडिंग एक्सपोजर पर भी लागू होगी।

इस सीमा की गणना सभी भारतीय रुपया करेंसी पेयर (अन्य विदेशी करेंसी) को मिलाकर की जाएगी। सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर मौजूद पोजीशन को एक साथ जोड़ा जाएगा।

सर्कुलर के मुताबिक, विदेशी मुद्रा-भारतीय रुपया कॉन्ट्रैक्ट्स में, एफपीआई की शॉर्ट पोजीशन किसी भी एक्सचेंज पर 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

वहीं, 5 मिलियन डॉलर से अधिक की लॉन्ग पोजीशन लेने के लिए, एफपीआई को भारतीय डेट या इक्विटी प्रतिभूतियों मेंअंडरलाइंग एक्सपोजर की आवश्यकता होगी।

इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स भी एफपीआई के लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर के रूप में मान्य हैं। घरेलू क्लाइंट आरबीआई की निर्धारित शर्तों के अधीन 5 मिलियन डॉलर से अधिक की पोजीशन ले सकते हैं।

इससे पहले सेबी ने बुधवार को भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) के लिए केवाईसी संबंधी नियमों में ढील दी है। इसके तहत वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के नियमों का अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले पात्र विदेशी निवेशक भारत में शारीरिक रूप से उपस्थित हुए बिना डिजिटल माध्यम से केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

इसका उद्देश्य अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) और विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय वित्तीय बाजारों में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना है। हालांकि, एफएटीएफ के नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले देशों में रहने वाले निवेशकों पर केवाईसी की मौजूदा आवश्यकताएं लागू रहेंगी।

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