निवेशकों के फीडबैक के बाद सेबी का बड़ा कदम, डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट नियमों में हो सकता है बदलाव
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट ...और पढ़ें

निवेशकों के फीडबैक के बाद सेबी का बड़ा कदम
HighLights
सेबी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद डेरिवेटिव सेटलमेंट वैल्यू की समीक्षा करेगा
इस संबंध में अगले सप्ताह एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा
हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर सेटलमेंट मूल्य की समीक्षा
नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करेगा। इस संबंध में सेबी अगले सप्ताह एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा।
सेबी ने बताया कि 16 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) की व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से लागू की गई थी। इस व्यवस्था के तहत सीएएस में तय होने वाला क्लोजिंग प्राइस ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने का आधार भी बना।
हर पक्ष से की गयी थी चर्चा
नियामक के अनुसार सीएएस का फ्रेमवर्क व्यापक विचार-विमर्श और हितधारकों से परामर्श के बाद तैयार किया गया था। इसके लिए दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में पब्लिक कंसल्टेशन आयोजित किए गए थे। इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकर संगठनों, संस्थागत निवेशकों, बाजार सहभागियों और अन्य हितधारकों के साथ भी विस्तृत चर्चा की गई थी।
सीएएस के कामकाज की निगरानी
सेबी ने कहा कि सीएएस लागू होने के बाद उसने स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, प्रोपाइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर विक्रेताओं, म्यूचुअल फंडों, उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) सहित विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा, ताकि इसके क्रियान्वयन से जुड़ी परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
सेबी ने पहले महीने के दौरान सीएएस के कामकाज और उसके बाजार पर पड़े प्रभाव की भी निगरानी की।
सेबी को मिले कई रेस्पॉन्स
इस दौरान सोशल मीडिया, अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न माध्यमों से बाजार सहभागियों की ओर से कई सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। सेबी के मुताबिक प्राप्त प्रतिक्रियाओं में सबसे प्रमुख मुद्दा यह रहा कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस को सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर निर्धारित करने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।
सेबी ने कहा कि सीएएस के शुरुआती अनुभव और हितधारकों से मिले सुझावों को देखते हुए वह डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित कर सकता है। इस संबंध में लगभग एक सप्ताह के भीतर परामर्श पत्र जारी किया जाएगा।
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