नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। इंडिया पोस्ट, जो कि भारत के पोस्टल नेटवर्क का संचालन करता है छोटे निवेशकों को लिए तमाम तरह की सेविंग स्कीम्स की पेशकश भी करता है। इनमें से एक खास स्कीम पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) है। पीपीएफ अकाउंट में जमा पैसों पर बेहतर ब्याज के साथ टैक्स बेनिफिट का भी फायदा मिलता है।

दिसंबर में खत्म हो रही तिमाही के लिए पीपीएफ अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज की दर 8 फीसद की है। वहीं इस अकाउंट में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज की गणना सालाना आधार पर की जाती है। मतलब इस पर मिलने वाले ब्याज को हर साल मूल धन में जोड़ दिया जाता है। यह जानकारी इंडिया पोस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज है।

पोस्ट ऑफिस के पीपीएफ अकाउंट के संबंध में 10 बातें जो आपको हर हाल में जाननी चाहिए:

  • पीपीएफ टैक्स की एग्जेंम्प्ट, एग्जेंम्प्ट, एग्जेंम्प्ट कैटेगरी में आता है। इसका मतलब हुआ कि इस खाते के मैच्योर होने पर मिलने मिलने वाली राशि, इस पर मिलने वाला रिटर्न और ब्याज आय तीनों इनकम टैक्स के छूट के दायरे में आती हैं। इस खाते में जमा की जाने वाली राशि आयकर की धारा 80C के अंतर्गत कर छूट के दायरे में आती है।
  • पीपीएफ अकाउंट को कैश या नकद दोनों के माध्यम से खोला जा सकता है। यह जानकारी इंडिया पोस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज है।
  • मात्र 100 रुपये के निवेश के साथ कोई भी पोस्ट ऑफिस में इस खाते को खुलवा सकता है। इस खाते में एक वित्त वर्ष के भीतर 500 रुपये (न्यूनतम) और अधिकतम 1,50,000 रुपये निवेश करने होते हैं।
  • इस खाते में आप अपने निवेश को एकमुश्त या फिर 12 किश्तों में (मासिक आधार पर) जमा करा सकते हैं।
  • पीपीएफ अकाउंट की मैच्योरिटी अवधि 15 वर्षों की होती है। वहीं सब्सक्राइबर्स की इच्छा पर इसे पांच वर्ष के एक का इससे अधिक ब्लॉक में बढ़वाया जा सकता है।
  • इस खाते में जमा राशि की 15 वर्ष से पहले यानी मैच्योरिटी से पहले निकासी की अनुमति नहीं मिलती है।
  • इस खाते को खोलते समय या फिर खाता खोलने के बाद इसमें नॉमिनेशन की सुविधा मिलती है। इस अकाउंट को एक डाकघर से दूसरे डाकघर में ट्रास्फर किया जा सकता है।
  • कोई भी सब्सक्राइबर्स माइनर के नाम से एक अन्य खाता खुलवा सकता है, हालांकि यहां पर भी सभी खातों में अधिकतम निवेश की सीमा का पालन करना होगा।
  • पीपीएफ खाते में जमा राशि की निकासी खाते के सात वर्ष पूरे होने के बाद ही मिलती है।
  • खाते के तीन वित्त वर्ष पूरा कर लेने के बाद इससे लोन लेने की भी सुविधा मिलती है।

Posted By: Praveen Dwivedi