नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। वेतनभोगी कर्मचारी के रिटायरमेंट की बाद की जरूरतें पूरी करने में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) काफी मददगार साबित होती है। ईपीएफ अकाउंट में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फीसद कर्मचारी की ओर से और 12 फीसद नियोक्ता की ओर से जमा होता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इपीएफ अकाउंट में रिटायरमेंट फंड तैयार करने के साथ ही दूसरी महत्वपूर्ण सुविधाएं भी देता है। ये हैं, बीमा, लोन और पेंशन। आइए जानते हैं कि पीएफ खाताधारकों को किस तरह से इन सुविधाओं का फायदा मिलता है।

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मिलती है इंश्योरेंस की सुविधा

बहुत से पीएफ खाताधारकों को पता ही नहीं होता कि उन्हें पीएफ अकाउंट के साथ इंश्योरेंस की भी सुविधा मिल रही है और वे इसका क्लेम करने से चूक जाते हैं। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि पीएफ खाताधारकों को एंप्लाय डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है। इस इंश्योरेंस के लिए कर्मचारी को अलग से आवेदन करने या प्रीमियम भरने की आवश्यकता नहीं है। ईपीएफ अकाउंट में नियोक्ता के योगदान का 0.5 फीसद स्वत: ही EDLI में चला जाता है।

इस इंश्योरेंस स्कीम में कर्मचारी को छह लाख रुपये तक का बीमा मिलता है। ईपीएफ खाताधारक की सर्विस अवधि में मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिजन, कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी को एकमुश्त भुगतान किया जाता है। यह भुगतान राशि कर्मचारी को पिछले 12 महीनों में मिली सैलरी का 30 गुना या अधिकतम छह लाख रुपये होती है। बीमा राशि प्राप्त करने के लिए नॉमिनी को एक फॉर्म भरकर ईपीएफओ ऑफिस में जमा करना होता है।

ले सकते हैं लोन

ईपीएफ खाताधारक पांच साल की सेवा अवधि पूरी करने के बाद अपने ईपीएफ अकाउंट पर लोन भी ले सकते हैं। कर्मचारी घर खरीदने, प्लॉट खरीदने, घर की मरम्मत कराने, विवाह या होम लोन चुकाने आदि के लिए पीएफ अकाउंट पर लोन ले सकता है। इसके लिए कर्मचारी को ईपीएफओ द्वारा उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा से पीएफ एडवांस के लिए आवेदन करना होता है। हालांकि, सोलंकी का मानना है कि इपीएफ अकाउंट रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए होता है, इसलिए इसे जब तक बहुत अधित जरूरत ना हो, तब तक नहीं छेड़ना चाहिए।

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पेंशन की भी है सुविधा

ईपीएफ अकाउंट में पेंशन की भी सुविधा होती है। यह कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) के नाम से जानी जाती है। इस स्कीम के तहत कर्मचारी की 58 साल की रिटायरमेंट की आयु होने के बाद पेंशन का प्रावधान होता है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी के सर्विस में कम से कम 10 साल पूरे होने चाहिए। कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन की राशि, कर्मचारी के पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सर्विस पर निर्भर करती है। नियोक्ता द्वारा पीएफ अकाउंट में किये जाने वाले 12 फीसद योगदान में से 8.33 फीसद या 1250 रुपये, जो भी कम हो, वह कर्मचारी पेंशन स्कीम में जमा होता है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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