नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि के लिए काफी फायदेमंद इन्वेस्टमेंट माना जाता है। भारत सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण यह एक सुरक्षित निवेश भी है। पीपीएफ में एक साल में डेढ़ लाख तक के योगदान पर टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है। टैक्स छूट में यह फायदा ग्राहक को आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत मिलता है। इसके अलावा पीपीएफ में मैच्योरिटी और ब्याज आय भी टैक्स फ्री होती है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के लिए सरकार ने ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। अर्थात ब्याज दर को 7.9 फीसद ही रखने का फैसला लिया गया है। सरकार हर तिमाही में पीपीएफ पर ब्याज दर को तय करती है। पीपीएफ अकाउंट में आप किसी वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम डेढ़ लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं।

पीपीएफ में ग्राहक के जमा पर ब्याज की गणना हर महीने की जाती है। हालांकि, आपके पीपीएफ अकाउंट में ब्याज साल के अंत में आता है। आइए जानते हैं कि पीपीएफ में ब्याज की गणना किस प्रकार होती है।

इसमें ब्याज की गणना हर महीने की 5 वीं और आखिरी तारीख के बीच की न्यूनतम राशि पर होती है। इसलिए अधिकतम ब्याज राशि पाने के लिए ग्राहक को अपना मासिक योगदान हर महीने की 5 तारीख से पहले जमा कराना चाहिए। अगर आपने किसी महीने की पांच तारीख से पहले ही योगदान दे दिया है, तो आपको उस महीने का भी ब्याज मिलता है।

मासिक योगदान करने पर

मान लीजिए कि किसी वित्त वर्ष में पीपीएफ अकाउंट पर ब्याज दर 7.6 फीसद है और आप अपने पीपीएफ अकाउंट में हर माह 12,500 रुपये जमा करा रहे हैं। ऐसे में साल के अंत में आपके पीपीएफ खाते में कुल ब्याज 5,858.33 रुपये होगा। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आपने अपने पीपीएफ अकाउंट में हर माह पांच तारीख से पहले योगदान दिया है, तो आपको 316.67 रुपये ज्यादा ब्याज मिलेगा।

एकमुश्त योगदान देने पर

अगर आप पीपीएफ अकाउंट में एकमुश्त योगदान कर रहे हैं, तो इसे महीने की पांच तारीख से पहले करें। अगर आपने पहली बार एकमुश्त योगदान उस महीने की पांच तारीख के बाद किया है तो आपको ब्याज के रूप में कम राशि मिलेगी। अगर आप एकमुश्त डेढ़ लाख रूपये का योगदन महीने की पांच तारीख के बाद कर रहे हैं, तो साल के अंत में आपको 950 रुपये कम ब्याज मिलेगा।

Posted By: Pawan Jayaswal

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