नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। सरकार ने 29 जुलाई को करदाताओं को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा को एक बार और आगे बढ़ाया था। अनुमान है कि समयसीमा को अब और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। कोरोना वायरस महामारी के चलते  22 मार्च 2020 से देश में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था। इससे सभी गतिविधियां बाधित हुईं। वित्त वर्ष की अंतिम तारीख 31 मार्च भी लॉकडाउन अवधि में आने के कारण सरकार को कई सारी समयसीमाओं को आगे बढ़ाना पड़ा, जिसमें से एक आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा भी है।

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आयकर विभाग ने तीसरी बार वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न भरने की समय सीमा को बढ़ाया है। अब करदाता 30 सितंबर तक अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इससे पहले सरकार ने इस समयसीमा को बढ़ाकर 31 जुलाई किया था। जबकि कर कानून के अनुसार, 31 मार्च तक ही आईटीआर फाइल की जा सकती थी। इसी तरह आयकर में विभिन्न छूट प्राप्त करने के लिए 31 मार्च तक ही निवेश किया जाना था। इस समयसीमा को सरकार ने 31 जुलाई 2020 तक आगे बढ़ाया था।

चार चरणों के लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार ने प्रतिबंधों को हटाना शुरू किया और अनलॉक की प्रक्रिया आरंभ की। दो अनलॉक्स के बाद अनलॉक-3 आया, जिसमें अधिक से अधिक गतिविधियां फिर से प्रारंभ हो गई। प्रतिबंध धीरे-धीरे हट रहे हैं और आने वाले समय में ये पूरी तरह भी हटेंगे। जिन लोगों ने अभी भी 31 मार्च 2020 को पूरे हुए वित्त वर्ष के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उन्हें अब यह कर देना चाहिए। अपनापैसा डॉट कॉम के चीफ एडिटर और टैक्स एवं इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन के अनुसार, अब करदाताओं को और इंतजार नहीं करना चाहिए।

और आगे नहीं बढ़ेगी समयसीमा

जैन का मानना है कि यह आईटीआर दाखिल करने के लिए समय सीमा के आगे बढ़ने का आखिरी मौका था, क्योंकि सरकार करदाताओं के लिए समयसीमा में असीमित विस्तार करने के मूड में नहीं है। यह इस बात से भी स्पष्ट होता है कि सरकार ने आयकर छूट के लिए निवेश की समयसीमा को 31 जुलाई से आगे नहीं बढ़ाया है। साथ ही जैन ने बताया कि करदाताओं को एक अप्रैल 2019 से आयकर भरने तक के शॉर्टफाल पर एक फीसद ब्याज का भुगतान भी करना होगा। हालांकि, सकल कर देयता के 10 फीसद से कम शॉर्टफाल रहने की स्थिति में कोई दंडनीय ब्याज नहीं देना होगा। यहां ध्यान रखें कि करदातायों को आईटीआर दाखिल करने में देरी के साथ-साथ करों के भुगतान में देरी पर ब्याज के लिए भी विलंब शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है।

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अगर बढ़ी हुई तारीख तक भी नहीं भरा आईटीआर..

बलवंत जैन के अनुसार अगर करदाता बढ़ी हुई समयसीमा तक भी कर छूट के बाद बकाया आयकर जमा कराने में नाकाम रहते हैं, तो आयकर विभाग बना भुगतान किये कर पर आपके द्वरा आइटीआर भरने में नाकाम रहने के लिए न्यूनतम 50 फीसद दंड शुल्क लगा सकता है। दंड शुल्क के अतिरिक्त आपको देरी की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान भी करना होगा। साथ ही अगर कर की राशि दस हजार से अधिक है, तो आयकर विभाग आपके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई भी शुरू कर सकता है। इसमें तीन महीने से लेकर सात साल तक की सजा हो सकती है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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