नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी की ओर से कई ऐसी पॉलिसी हैं जो बंद हो चुकी हैं। इनकी जानकारी कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर भी दी हुई है। इन्हें बंद करने के पीछे का कारण कंपनी ने यह दिया कि लगातार ब्याज दरें घटने की वजह से इन पॉलिसी पर निवेशकों को अच्छे रिटर्न देना मुश्किल हो रहा था। अगर आप भी पॉलिसी की खरीद करने जा रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि कौन सी पॉलिसी बंद हो चुकी हैं।

ये पॉलिसी हो चुकी हैं बंद-

एलआईसी की वेबसाइट के अनुसार अब कोई भी निवेशक, जीवन सुगम, जीवन वैभव (एकल प्रीमियम बंदोबस्ती आश्वासन योजना), जीवन वृद्धि, फॉर्च्यून प्लस प्लान, वेल्थ प्लस, मार्केट प्लंस - I, प्रॉफिट प्लस, मनी प्लस I, चाइल्डफ फॉर्च्यून प्लस, जीवन साथी प्लस, समृद्धि प्लस, पेंशन प्लस, जीवन निधि, नव जीवन धारा-I, नयी जीवन सुरक्षा - I, हेल्थ प्लस, वेल्थ प्लस, प्रॉफिट प्लस, मनी प्लस I, चाइल्डय फॉर्च्यून प्लस, जीवन साथी प्लस, समूह सुपर एनुएशन प्लस, प्रॉफिट प्लस, बीमा खाता 1, बीमा खाता 2, सीडीए इंडोवमेंट वेस्टिंग 21 पर, सीडीए इंडोवमेंट वेस्टिंग 18, जीवन मित्र (तिगुनी सुरक्षा), धन वापसी योजना-25 वर्ष, जीवन मित्र (दुगुनी सुरक्षा), जीवन प्रमुख आजीवन पॉलिसी, आजीवन पॉलिसी-सीमित भुगतान, द्विवर्षीय अस्थायी बीमा पॉलिसी, जीवन मित्र (दोगुनी सुरक्षा बंदोबस्ती योजना), जीवन अमृत, जीवन सुरभि - 25 वर्ष

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अगर आपकी ओर से खरीदी हुई पॉलिसी बंद हो गई है तो ऐसे में घबराने की जरुरत नहीं है। पॉलिसी की मैच्योरिटी पर पॉलिसी बॉन्ड में बताई गई सभी सुविधाएं मिल जाती हैं। कंपनी की ओर से पॉलिसी उस स्थिति में बंद की जाती है जब उसकी आमदनी घट जाती है।

एजेंट ने अगर बेच दी है गलत पॉलिसी तो क्या करें-

फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी का मानना है कि अगर आपको गलत पॉलिसी बेच दी गई है तो इंश्योरेंस कंपनी की शाखा में जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर कंपनी आपकी शिकायत पर कोई जवाब नहीं देती है तो ओम्बड्समैन (लोकपाल) या कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत लेकर जाएं। वहीं, उन्होंने बताया कि अगर आप गलत पॉलिसी खरीद से बचना चाहतें है तो कोशिश करें कि फिजिकल फॉर्म को अपने हाथ से भरें। यह एजेंट को न भरने दें।

अधिकांश समय जल्दबाजी में एजेंट पॉलिसीधारक की मेडिकल हिस्ट्री छुपा देते हैं। ऐसे में जब भविष्य में आप क्लेम करने जाते हैं तो पॉलिसीधारक को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दूसरा, इस बात का ध्यान रखें कि पॉलिसी खरीदते समय एक ही एजेंट की बातों में न आएं। फाइनेंशियल एडवाइजर से पॉलिसी के लाभ के बारे में पता करें और उसके बाद ही पॉलिसी खरीद का फैसला करें।

Posted By: Surbhi Jain