घुटने की सर्जरी करवाने के लिए कैसे मिलता है बीमा कवरेज, क्या रोबोटिक प्रत्यारोपण पर कम खर्च होगा?
हम आपको घुटने की सर्जरी के लिए बीमा कवरेज कैसे मिलेगा इसके बारे में बता रहे हैं। इसमें यह भी बताया जा रहा है कि क्या रोबोटिक प्रत्यारोपण प्रक्रियाएं ल ...और पढ़ें

नई दिल्ली। भारत में अब घुटनों की समस्या केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। आर्थराइटिस, खेलों में चोट, मोटापा, बैठकर काम करने की आदत और कोविड के बाद की जटिलताओं के कारण युवा और मध्यम आयु वर्ग में भी घुटने की सर्जरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि पारंपरिक (कन्वेंशनल) घुटना सर्जरी कराएं या रोबोटिक सर्जरी? इसके अलावा सबसे अहम बात, इसका खर्च और इंश्योरेंस कवरेज क्या होगा?
पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी क्या है?
पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी एक मैन्युअल प्रक्रिया होती है, जिसमें सर्जन अपने अनुभव और पारंपरिक उपकरणों की मदद से खराब हो चुके घुटने के जोड़ को बदलता है। यह तकनीक दशकों से इस्तेमाल में है और पूरी तरह प्रमाणित व भरोसेमंद मानी जाती है।
इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग हर बड़े अस्पताल में उपलब्ध है और इसकी शुरुआती लागत अपेक्षाकृत कम होती है। भारत में एक घुटने की पारंपरिक सर्जरी का खर्च आमतौर पर ₹1.8 लाख से ₹3.5 लाख तक होता है, जो शहर और अस्पताल पर निर्भर करता है।
रोबोटिक घुटना सर्जरी क्या है?
रोबोटिक घुटना सर्जरी में कंप्यूटर-नियंत्रित रोबोटिक सिस्टम सर्जन की सहायता करता है। यह रोबोट अपने आप सर्जरी नहीं करता, बल्कि इम्प्लांट को अधिक सटीकता से लगाने में सर्जन की मदद करता है।
इस तकनीक के फायदों में बेहतर अलाइनमेंट, कम टिश्यू डैमेज, ऑपरेशन के बाद कम दर्द, जल्दी चलने-फिरने की क्षमता और भविष्य में दोबारा सर्जरी की संभावना कम होना शामिल हैं। हालांकि, इन आधुनिक सुविधाओं के कारण इसकी लागत अधिक होती है। भारत में एक घुटने की रोबोटिक सर्जरी का खर्च ₹3.5 लाख से ₹6.5 लाख तक हो सकता है।
क्या रोबोटिक घुटना सर्जरी इंश्योरेंस में कवर होती है?
इस सवाल का सीधा जवाब है हाँ, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। भारत में अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को कवर करती हैं, चाहे वह पारंपरिक हो या रोबोटिक, बशर्ते सर्जरी चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हो।
समस्या तब आती है जब इंश्योरेंस कंपनी रोबोटिक सर्जरी को “नवीन या आधुनिक उपचार” के रूप में वर्गीकृत करती है। कई बार रोबोटिक से जुड़े अतिरिक्त खर्चों पर सब-लिमिट या आंशिक भुगतान लागू हो जाता है।
इंश्योरेंस से जुड़ी इन अहम बातों का रखें ध्यान
रूम रेंट और आईसीयू लिमिट
रोबोटिक सर्जरी अक्सर प्रीमियम कमरों में की जाती है। यदि आपकी पॉलिसी में रूम रेंट की सीमा है, तो उसी अनुपात में बाकी खर्च भी कट सकते हैं। यही सबसे बड़ा कारण होता है अधिक आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च का।
इम्प्लांट और कंज्यूमेबल्स की सीमा
कुछ पॉलिसियों में घुटने के इम्प्लांट, सर्जिकल सामग्री और रोबोटिक उपकरण शुल्क पर कैप होती है। इससे क्लेम की पूरी राशि नहीं मिल पाती।
मॉडर्न ट्रीटमेंट क्लॉज
IRDAI के दिशानिर्देशों के अनुसार आधुनिक उपचार कवर होने चाहिए, लेकिन कई बीमा कंपनियां इनमें सब-लिमिट या शर्तें जोड़ देती हैं, जिससे विवाद की स्थिति बनती है।
वेटिंग पीरियड
घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी पर आमतौर पर 2 से 3 साल का वेटिंग पीरियड होता है। यदि इस अवधि से पहले सर्जरी कराई जाती है, तो क्लेम खारिज भी हो सकता है।
सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी का खर्च क्या कवर होता है?
अस्पताल में रहने के दौरान दी जाने वाली फिजियोथेरेपी आमतौर पर कवर हो जाती है। लेकिन डिस्चार्ज के बाद घर पर होने वाली फिजियोथेरेपी अक्सर पॉलिसी में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं होती। यह कभी-कभी पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन खर्च या ओपीडी राइडर के तहत मिल सकती है। घर पर फिजियोथेरेपी का खर्च ₹500 से
₹2,000 प्रति सत्र तक हो सकता है।
कौनसा विकल्प आपके लिए सही है?
यदि आपका बजट सीमित है, पॉलिसी में सख्त सब-लिमिट हैं और सर्जरी अपेक्षाकृत सरल है, तो पारंपरिक सर्जरी एक व्यावहारिक विकल्प है। वहीं, यदि आप तेज रिकवरी, बेहतर सटीकता और लंबी अवधि के फायदे चाहते हैं और आपके पास व्यापक इंश्योरेंस कवरेज है, तो रोबोटिक सर्जरी बेहतर साबित हो सकती है।
क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?
सर्जरी से पहले लिखित प्री-ऑथराइजेशन जरूर लें। अस्पताल से पूरा आइटमाइज्ड अनुमान मांगें और अपनी पॉलिसी में रूम रेंट, इम्प्लांट कैप और मॉडर्न ट्रीटमेंट क्लॉज अच्छे से चेक कर लें। सभी मेडिकल रिपोर्ट और बिल सुरक्षित रखें। यदि क्लेम कम पास हो या खारिज हो जाए, तो समय पर सही तरीके से अपील करना बहुत जरूरी है।

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