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    अब Policybazaar पर भी मिलेगा LIC का बीमा, दोनों कंपनियों के बीच हुआ समझौता

    By Ashish DeepEdited By:
    Updated: Fri, 04 Feb 2022 03:41 PM (IST)

    LIC और पॉलिसीबाजार डॉट कॉम ने उपभोक्ताओं को टर्म और निवेश उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश करने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों ने औपचारिक रूप से 3 फरवरी 2022 को एकसाथ कारोबार शुरू किया।

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    LIC Join Hands With Policibazaar For Insurance Policy Sale

    नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance corp. of India, LIC) ने उपभोक्ताओं के लिए टर्म और निवेश उत्पादों (Term and Investment instruments) के उच्चतम विकल्प उपलब्ध कराने के लिए पॉलिसीबाजार (Policybazaar) के साथ हाथ मिलाया है। LIC बीते कई दशकों से बीमा उत्पाद उपलब्ध करा रही है। दोनों कंपनियों ने औपचारिक रूप से 3 फरवरी, 2022 को एकसाथ कारोबार शुरू किया।

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    इस समझौते के वक्‍त LIC उत्तर मध्य क्षेत्र, नई दिल्ली के क्षेत्रीय प्रबंधक दिनेश भगत और पॉलिसीबाजारडॉटकॉम के CEO सरबवीर सिंह सहित दोनों कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट उपस्थित थे। सरबवीर सिंह ने कहा कि इस करार के साथ हमारा रणनीतिक उद्देश्य वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छोटे शहरों में अपनी पहुंच का विस्तार करना है। भारतीय जीवन बीमा निगम ने देश में जीवन बीमा सेगमेंट का नेतृत्व किया है और इसलिए यह करार लोगों तक व्यापक पहुंच प्रदान करेगा। हमें भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ साझेदारी करके खुशी हो रही है और हम सभी लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार हैं।

    बता दें कि सरकार LIC को मार्च अंत में शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराएगी। LIC के IPO को लेकर विवरण पुस्तिका को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्दी ही इसे बाजार नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) के पास जमा कराया जाएगा। एलआईसी की विनिवेश राशि इस साल के बजट में शामिल है क्योंकि हमारा इसे 31 मार्च से पहले सूचीबद्ध कराने का लक्ष्य है। सरकार के लिए विनिवेश लक्ष्य हासिल करने को लेकर एलआईसी का आईपीओ (LIC IPO) काफी महत्वपूर्ण है।

    1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य

    विनिवेश लक्ष्य वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में 1.75 लाख करोड़ रुपये है। पिछले वित्त वर्ष में विनिवेश से 32,835 करोड़ रुपये जुटाए गये थे। चालू वित्त वर्ष में अबतक सार्वजनिक उपक्रमों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर 9,330 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। (Pti इनपुट के साथ)