नई दिल्‍ली, पंकज मठपाल। म्युचअल फंड जो निवेशकों के पैसों को शेयर बाजार में निवेश करते उन्हें हम इक्विटी फंड के रूप में जानते हैं लेकिन सभी इक्विटी फंड एक जैसे नहीं होते। ये फंड जिस प्रकार के शेयरों में निवेश करते हैं और इनकी निवेश की जो रणनीति होती है उसके के आधार पर इन्हें विभिन्न वर्गों में बाटा जा सकता हैं। अर्थव्यवस्था में तेजी और मंदी का क्रम चलता रहता है। जिस तरह मौसम का एक चक्र होता है यानि सर्दी के बाद गर्मी और उसके बाद बरसात उसी प्रकार अर्थव्यवस्था में भी अलग-अलग चरण होते हैं और हर चरण में एक अलग बिजनेस साइकल होती है। साथ ही उद्योग जगत में अलग अलग सेक्टर होते हैं जैसे की बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी, इत्यादि और हर एक सेक्टर में कई कंपनियां होती हैं। हर बिजनेस साइकल में निवेश का एक अनोखा अवसर होता है। जिस तरह हर मौसम में हमारे रहन-सहन, खान-पान इत्यादि में बदलाव आता है उसी प्रकार अलग-अलग बिजनेस साइकल में ये सेक्टर एक दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। बिजनेस साइकल के अनुरूप यदि सेकटर का चुनाव करके निवेश के लिए उस सेक्टर से जुड़े शेयरों का पोर्टफोलियो बनाया जाए तो बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

बिजनेस साइकल फंड की विशेषता

बिजनेस साइकल फंड एक तरह के थीमैटिक फंड हैं। थीमैटिक फंड का मतलब होता है कि कुछ चुनिंदा सेक्टर का पोर्टफोलियो जो किसी न किसी तरह से एक-दूसरे से संबंधित हों। उदाहरण के तौर पर यदि हम एक इंफ्रास्ट्रक्टर थीम की बात करें तो उसमे पावर, सीमेंट, टेलीकॉम, सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल होंगे। वहीं, यदि हम कंजंप्‍शन थीम की बात करें तो उसमें एफएमसीजी, सर्विसेज, बैंकिंग, आईटी इत्यादि सेक्टर्स हो सकते हैं। लेकिन बिजनेस साइकल फंड में ऐसा नहीं है यहां पर बिजनेस साइकल के मुताबिक सेक्टर में बदलाव किया जा सकता है। यानि कि बिजनेस साइकल फंड दूसरे थीमेटिक फंड से कई मायनों में अलग होते हैं। सामान्य तौर पर किसी थीमेटिक फंड के पोर्टफोलियो में उस थीम से संबंधित कुछ चुनिंदा सेक्टर्स हो सकते हैं किन्तु एक बिजेनस साइकल फंड का निवेश सभी तरह से सेक्ट्स और सभी तरह के मार्केट कैप वाले स्टॉक्स में हो सकता है। जोखिम की दृष्टि से थीमेटिक फंड को सेक्टोरल फंड और डाइवर्सिफाइड फंड के बीच रखा जा सकता है। जहां एक सेक्टोरल फंड एक ही सेक्टर के शेयरों में निवेश करता है वहीं एक डाइवर्सिफिएड फंड में सभी सेक्टर की कंपनियों में निवेश का अवसर होता है। एक बिजनेस साइकल फंड की तुलना एक डाइवर्सिफाइड फंड से की जाये तो जहां एक ओर एक डाइवर्सिफाइड फंड के पोर्टफोलियो में हर बिजनेस साइकल में हर प्रकार के सेक्टर शामिल हो सकते हैं वहीं एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर्स का रोटेशन होता रहता है।

बिजनेस साइकल के अनुसार जिन सेक्टर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है उन सेक्टर को इस तरह के फंड के पोर्टफोलियो में शामिल किया जाता है। सामान्यतया चयन की एक विशेष प्रक्रिया के आधार पर पहले बिजनेस साइकल के अनुरूप सेक्टर का चुनाव किया जाता है और फिर उन सेक्टर के आर्थिक तौर पर मजबूत कंपनियां चुनी जाती हैं। बिजनेस साइकल फंड के पोर्टफोलियो में डिफेन्सिव और नॉन-डिफेंसिव सेक्टर हो सकते हैं। डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी और टेलीकॉम इत्यादि स्थिर होते हैं और ये सेक्टर आर्थिक मंदी के दौर में भी ठीक प्रदर्शन कर सकते हैं किन्तु नॉन-डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फाइनेंशियल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट इत्यादि आर्थिक तेजी के दौर में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

निवेश के पीछे तर्क

शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी हद तक बिजनेस साइकल पर निर्भर होता है और क्योंकि एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर का रोटेशन होता है इसलिए इस श्रेणी के फंड सभी परिस्थियों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। एक बिजनेस साइकल में चार चरण होते हैं- विस्तार, पीक यानि तेजी, कॉन्ट्रैक्शन यानि संकुचन और स्लंप यानि मन्दी। अक्सर देखा गया है कि बिजनेस साइकल के बदलाव पर कुछ शेयरों का प्रदर्शन भी बदल जाता है। ऐसे में यदि निवेश का पोर्टफोलियो बिजनेस साइकल के अनुरूप हो तो इससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

किसके लिए है उपयुक्त

ऐसे निवेशक जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझते हैं और उससे संबंधित जोखिम को सहने की सहने की क्षमता रखते हैं वे 5 वर्ष या उससे अधिक अवधि के नजरिये से इस तरह के फंड में निवेश करके अच्छे लाभ की उम्मीद कर सकते हैं। बिजनेस साइकल फंड में एकमुश्त और एसआईपी के जरिये किस्तों में निवेश किया जा सकता है किन्तु वर्तमान स्थिति में जब बाजार अपने उच्चतम स्तरों के आसपास है तब एसआईपी के जरिये निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है। इस कैटेगरी में अब तक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बिजनेस साइकल फंड, टाटा बिजनेस साइकल फंड और एल एन्ड टी बिजनेस साइकल फंड जैसे कुछ चुनिंदा फंड हैं और अब 15 नवम्बर से आदित्य बिरला सन लाइफ का न्यू फंड ऑफर यानि कि एनएफओ खुला है जो कि 29 नवंबर तक खुला रहेगा। यह एक ओपन एंडेड फंड है इसलिए एनएफओ बंद होने के बाद भी यह फंड खरीदी और बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।

(लेखक ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर एवं सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं। निवेश से पहले अपने निवेश सलाहकार की सलाह अवश्‍य लें।)

Edited By: Manish Mishra