नई दिल्‍ली, अरिंदम चंदा। एक खुदरा निवेशक की नजरिये से बाजार की स्थिति इस समय सही नहीं है। पिछले एक वर्ष में निफ्टी 15 प्रतिशत उपर चढ़ा है, लेकिन निवेशकों का निवेश बहुत ज्यादा नहीं बढ़ पाया है। इसका कारण यह है कि पिछले एक वर्ष में निवेश का मूल मंत्र सुरक्षा और क्वालिटी रहा है। टॉप 10 स्टॉक्स ने 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इनमें बड़े वित्तीय संस्थान जैसे आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस, बडे उपभोक्ता ब्रांड जैसे टाइटन और एशियन पेंटस शामिल हैं। बीपीसीएल का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। यह सौ प्रतिशत तक बढ़ा है। सब जानते हैं कि इसका बड़ा कारण इसके निजीकरण से जुडी चर्चाएं थीं। एक चक्र के रूप में उपर नीचे होने वाले कोल इंडिया और टाटा स्टील तथा फार्मा स्‍टॉक जैसे सिप्ला भी खिंचते रहे। 

यह स्थिति वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी, कारपोरेट गवर्नेंस और प्रमोटर प्ले जैसे मुद्दों, लक्जरी रियल एस्टेट सेक्टर और इनसे जुड़ी एनबीएफसी पर लगातार दबाव और सुरक्षित तथा चक्रीय सेक्टर्स में निवेश का तेजी से बढ़ने जैसे कारणों की वजह से पैदा हुई है। इस वर्ष एनएसई मिडकैप 100 इन्डेक्स बिल्कुल सपाट रहा है और इसमें लार्ज कैप्स नहीं आ पाए हैं (यह भी जोखिम से दूर रहने का एक और प्रमाण है)। मिड कैप इंडेक्स और लार्ज कैप्स में ट्रेंड लगभग एक जैसे ही रहे हैं। 

अभी कम से कम आने वाले कुछ दिनों (तीन महीने या कुछ और समय तक) यह लगभग “ऐसा ही रहेगा”। उच्च क्वालिटी के सुरक्षित लार्जकैप ही अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे। हालांकि, इस पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। जैसे ही वृद्धि पर फिर शुरू होगी बहुत ज्यादा बिक चुके चक्रीय स्‍टॉक्स भी चढ़ जाएंगे। यह कहना मुश्किल है कि यह बदलाव कब आएगा, लेकिन मेरा मानना है कि यह दिवाली से शुरू होने वाले नए सम्वत से संभव हो सकता है। मुझे उम्मीद है कि सरकार ग्रोथ बढ़ाने के लिए कुछ नए उपाय लेकर आएगी। एफएमसीजी, बड़े वित्तीय संस्थान इनमें जीवन बीमा और साधारण बीमा भी शामिल है, हमारे पसंदीदा क्षेत्र बने रहेंगे। कुल मिला कर बाजार नीचे से उपर ही जाएगा, बजाए नीचे आने के। यही कारण है कि सही सेक्टर्स के सही स्‍टॉक्स पकड़ना जरूरी है। 

खुदरा निवेशकों का स्‍टॉक मार्केट में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, क्योंकि वे मिडकैप या स्‍मॉल कैप में निवेश करना पसंद करते हैं। हाल में हुए मार्केट करेक्शन में बहुत सारा पैसा टॉप के दस स्‍टॉक्स में चला गया, जबकि बाकी बाजार यूं ही रह गया। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि ज्यादातर खुदरा निवेशक अब म्युचुअल फंडस के सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्‍स (सिप) के जरिए निवेश कर रहे हैं। हमने देखा है कि एनएवी में आई अस्थाई गिरावट निवेश पैटर्न पर बहुत ज्यादा असर नहीं डालती है। इसलिए हमें इस ट्रेंड को देखना चाहिए कि खुदरा निवेशक ज्यादा म्युचुअल फंडस और निश्चित आय के उपायों के जरिए आ रहा है। वे भरोसे लायक कम्पनियों के बॉन्‍ड्स में निवेश कर सकते हैं। 

आज की स्थिति में घरेलू खुदरा और संस्थागत निवेश सकारात्मक रहने की उम्मीद है। वे बाजार के शुद्ध खरीदार बने रहेंगे। भारत पर एफपीआई नेचुरल हैं और इनमें अभी किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। 

आर्थिक मंदी की बात करें तो लगता है कि बुरा समय बीत गया है। हमारा मानसून अच्छा गया है और रबी की बम्पर फसल की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों की उंची आय से सभी क्षेत्रों पर प्रभाव पडेगा और उपभोग की दर बढ़ने वाली है। आरबीआई ने पहले ही ब्याज दरें कम कर दी हैं और सरकार ने हाल में जो कदम उठाए हैं, वे निश्चित रूप से सहायक सिद्ध होंगे। 

(लेखक आईआईएफएल सिक्योरिटीज लिमिटेड के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

Posted By: Manish Mishra

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