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    Life Insurance लेते समय ना करें ये 6 गलतियां, वरना हो जाएगा बड़ा नुकसान

    By Ankit KumarEdited By:
    Updated: Sun, 01 Aug 2021 06:14 PM (IST)

    Life Insurance Buying Tips कई स्मार्ट लोग पूरी जानकारी नहीं देकर सबसे बड़ी गलती करते हैं। उन्हें लगता है कि वे जानते हैं कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय किस चीज की जानकारी देनी चाहिए और किसी चीज की जानकारी नहीं देनी चाहिए।

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    अपने वित्तीय फैसलों के बारे में अपने ऊपर निर्भर लोगों को जानकारी नहीं देना सबसे बड़ी गलती है।

    नई दिल्ली, अनूप सेठ। कई बार आर्थिक रूप से काफी जानकार लोगों से भी बजट बनाने में चूक से लेकर किसी भी इमरजेंसी के लिए अपर्याप्त प्लानिंग जैसी वित्तीय गलतियां हो जाती हैं। चूक करना गलत नहीं है। हालांकि, खुद को पहचानने की प्रक्रिया और लर्निंग आपके लिए उपयुक्त वित्तीय प्रबंधन को सीखने का सबसे बढ़िया तरीका है। हालांकि, जीवन बीमा (लाइफ इंश्योरेंस) एक ऐसा इंस्ट्रुमेंट है, जिसमें गलती की थोड़ी बहुत गुंजाइश बनी रहती है। इस गलती का खामियाजा पॉलिसीहोल्डर्स पर निर्भर लोगों को उठाना पड़ता है। जोखिम प्रबंधन के माध्यम के रूप में जीवन बीमा आपके नहीं रहने पर आपके प्रियजनों के वित्तीय हितों की रक्षा करते हैं। ऐसे में इस मामले में किसी तरह की छोटी या बड़ी चूक से बचना काफी अहम है।

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    ऐसे में जीवन बीमा को लेकर होने वाली आम गलतियों क्या हैं और सभी तरह की सावधानी के साथ बीमा खरीदकर इन गलतियों से कैसे बचा जा सकता है? आइए डालते हैं एक नजरः

    1.टर्म इंश्योरेंस नहीं खरीदने की गलती

    लोग अपने रुपयों में बढ़ोत्तरी पर बहुत अधिक जोर देते हैं और संपत्ति के सृजन एवं निवेश के लिए जीवन बीमा खरीद लेते हैं। वे एक टर्म प्लान खरीदने से बचते हैं और इसके लिए यह तर्क देते हैं कि मौजूदा निवेश से जुड़े इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स भी लाइफ कवर देते हैं या उन्होंने अन्य इंस्ट्रुमेंट के जरिए पर्याप्त राशि जुटा ली है।

    हालांकि, अधिकतर लोगों को इस बात का अहसास नहीं होता है कि टर्म प्लान का बुनियादी लक्ष्य वित्तीय स्थिरता को प्रभावित किए बगैर आर्थिक निरंतरता में सहायता करना है। आपका निवेश आम तौर पर बच्चों की शिक्षा, रिटायरमेंट इत्यादि जैसे लक्ष्यों से जुड़ा होता है। कोई भी व्यक्ति शायद ही अपने परिवार की वित्तीय निरंतरता के लिए कोई फंड बनाता है। ऐसे में अगर आप पर कुछ लोग वित्तीय रूप से निर्भर हैं तो टर्म प्लान वैकल्पिक नहीं है।

    2. सबके लिए एक समाधान सही नहीं

    जीवन बीमा लंबी अवधि का सॉल्यूशन है। इसमें पॉलिसीहोल्डर्स को शायद ही कोई सीधा फायदा होता है क्योंकि यह आप पर निर्भर लोगों के लिए खरीदा जाता है। इसमें तत्काल लाभ नहीं होने की वजह से लोग लाइफ इंश्योरेंस खरीदते समय ‘अधिक’ की मांग करते हैं। लोग कई लक्ष्यों को एक समाधान से जोड़ने की गलती बार-बार करते हैं। इससे फाइनेंशियल प्रोवजनिंग कम पड़ जाती है। यह याद रखना जरूरी है कि लाइफ इंश्योरेंस जीवन के महत्वपूर्ण चरणों से जुड़े वित्तीय जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे में सभी लक्ष्यों के लिए ही एक ही इंस्ट्रुमेंट लेने की गलती से बचना चाहिए क्योंकि इससे आने वाले समय में आपका जीवन पटरी से उतर सकता है।

    3. जानकारी छिपाने की गलती

    कई स्मार्ट लोग पूरी जानकारी नहीं देकर सबसे बड़ी गलती करते हैं। उन्हें लगता है कि वे जानते हैं कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय किस चीज की जानकारी देनी चाहिए और किसी चीज की जानकारी नहीं देनी चाहिए। इस पूरी खरीदारी के प्रोसेस में व्यक्ति के रिस्क प्रोफाइल (फाइनेंशियल और मेडिकल) से जुड़ा अंडरराइटिंग सबसे अहम होता है। प्रीमियम में बढ़ोत्तरी ना हो, इससे बचने के लिए लोग पूरी जानकारी नहीं देते हैं। इस तरह की गलतियों की वजह से इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम को खारिज कर देती हैं। इससे पॉलिसी को खरीदने का पूरा मकसद बेकार चला जाता है।

    4. परिवार को जानकारी नहीं होना

    अपने वित्तीय फैसलों के बारे में अपने ऊपर निर्भर लोगों को जानकारी नहीं देना सबसे बड़ी गलती है। लाइफ इंश्योरेंस खरीदने का असली मकसद पूरा नहीं होगा अगर आप पर निर्भर लोगों को आपकी पॉलिसी का विवरण नहीं मालूम होगा।

    5.लाइफ कवर की समीक्षा है जरूरी

    लाइफ इंश्योंरेंस लंबी-अवधि का इंस्ट्रुमेंट है। लोगों को आम तौर पर ऐसा लगता है कि एक बार खरीदने के साथ ही आपका मकसद पूरा हो गया। हालांकि, आप जैसे-जैसे जीवन के विभिन् स्टेज से गुजरते हैं, आपके जीवन की वित्तीय बाध्यताएं भी बदलती हैं। इसलिए अपने लाइफ कवर की समीक्षा करना जरूरी होता है। ऐसा साल में कम-से-कम एक बार करना जरूरी होता है।

    6.इंस्ट्रुमेंट की तुलना

    स्मार्ट लोग द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह है कि वे इंश्योरेंस और अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के बीच तुलना करते हैं। उदाहरण के लिए, फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना प्रायः गारंटीड इंश्योरेंस प्लान से होती है। हालांकि, FDs और गारंटीड प्लान का मकसद अलग-अलग होता है। इनमें से एक सेविंग प्रोडक्ट है जबकि दूसरा संपत्ति के सृजन से जुड़ा समाधान है। इसी तरह ULIP की तुलना प्रायः SIP से की जाती है। इन दोनों की तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि इन दोनों का मकसद अलग-अलग है और दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं।

    हर वित्तीय फैसले का एक लक्ष्य होता है और लाइफ इंश्योरेंस के मामले में मकसद साफ है- आपके परिवार के सपने और आकांक्षाओं की सुरक्षा। किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए अपने आप से यह पूछना चाहिए कि मैं किस तरह अपने परिवार की वित्तीय निरंतरता को बिना किसी परेशानी के जारी रख सकता हूं। आप जब इस सवाल का जवाब देने की स्थिति में होंगे तो हर चीज सही तरीके से हो जाएगी।

    (लेखक एडलवाइज टोक्यो लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रिब्यूशन ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)